विकास नंद /सर्वव्यापी/
छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की सदस्य सरला कोसरिया ने साहू समाज द्वारा प्री-वेडिंग शूट और फिजूलखर्ची पर प्रतिबंध लगाए जाने के निर्णय का स्वागत करते हुए इसे समाजहित और बेटियों की सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है। उन्होंने कहा कि महिला आयोग में पहले भी प्री-वेडिंग शूट से जुड़े कई प्रकरण सामने आ चुके हैं, जिनसे स्पष्ट है कि यह परंपरा कई बार विवाद और रिश्तों के टूटने का कारण बनती है।प्रदेश साहू संघ की बैठक में लिए गए इस फैसले की सराहना करते हुए सरला कोसरिया ने कहा कि प्री-वेडिंग शूट एक तरह की कुरीति बनती जा रही है, जिससे समाज में अनावश्यक तनाव और पारिवारिक समस्याएं बढ़ रही हैं। उन्होंने अन्य समाजों से भी इस परंपरा पर रोक लगाने का आग्रह किया।उन्होंने महिला आयोग में सुनवाई किए गए धमतरी जिले के एक प्रकरण का उल्लेख करते हुए बताया कि साहू समाज की ही एक युवती का विवाह तय होने के बाद प्री-वेडिंग शूट हुआ था, लेकिन विवाह की निर्धारित तिथि पर वर पक्ष ने शादी से इंकार कर दिया। इस मामले में महिला आयोग ने संबंधित युवक को विवाह में हुए खर्च की राशि वापस करने तथा प्री-वेडिंग शूट से संबंधित फोटो और वीडियो हटाने के निर्देश दिए थे। निर्देशों के पालन के बाद आवेदिका की संतुष्टि पर प्रकरण का निराकरण किया गया।सरला कोसरिया ने कहा कि जब-जब उन्हें अवसर मिलता है, वे इस विषय पर अपनी बात रखती हैं, क्योंकि भारतीय संस्कृति को छोड़कर पश्चिमी संस्कृति का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है, जिससे सामाजिक मूल्यों को क्षति पहुंच रही है।उन्होंने साहू समाज का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि प्री-वेडिंग शूट पर प्रतिबंध लगाकर समाज ने संस्कृति संरक्षण की दिशा में एक सराहनीय पहल की है। साथ ही उन्होंने आशा जताई कि अन्य समाज भी शीघ्र ही ऐसे निर्णय लेंगे, जिससे बेटियां स्वयं को अधिक सुरक्षित और सम्मानित महसूस कर सकें।