वन मार्ग के नाम पर 31.57 लाख का संगठित गबन! तत्कालीन डीएफओ पर फर्जी बिल-मजदूरी से सरकारी खजाने की लूट का आरोप,मुख्यमंत्री और वन मंत्री से दस्तावेजी शिकायत, एफआईआर व वसूली की मांग।

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तरुण कौशिक/संपादक सर्वव्यापी/

बिलासपुर संभाग अंतर्गत गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के मरवाही वन विभाग में कथित भ्रष्टाचार का एक और गंभीर मामला सामने आया है। तत्कालीन वनमंडल अधिकारी मरवाही रौनक गोयल, उपवनमंडल अधिकारी पेंड्रा मोहन सिंह मरकाम एवं वन परिक्षेत्र अधिकारी पेंड्रा ईश्वरीय प्रसाद खूटे पर आरोप है कि उन्होंने डब्ल्यूबीएम वन मार्ग निर्माण कार्य (03 किमी.) के नाम पर बिना मुरूम-बोल्डर की वास्तविक खरीदी और बिना मजदूरी कार्य कराए फर्जी प्रमाणक व बिल तैयार कर 31,57,318 रुपये का संगठित गबन किया।आरोपों के अनुसार, कागजों में भारी-भरकम निर्माण कार्य दर्शाया गया, जबकि जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट बताई जा रही है। सामग्री खरीदी और श्रम भुगतान से जुड़े आवश्यक अभिलेखों में गंभीर अनियमितताएं सामने आने का दावा किया गया है, जो पूरे प्रकरण को पूर्व नियोजित और संगठित वित्तीय अपराध की ओर संकेत करता है।इस पूरे मामले की पूरे दस्तावेजों के साथ शिकायत मुख्यमंत्री विष्णु देव साय एवं वन मंत्री केदार कश्यप से की गई है। शिकायत में स्पष्ट रूप से मांग की गई है कि प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कर तत्काल एफ.आई.आर. दर्ज की जाए, दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई हो तथा गबन की पूरी राशि शासन को वसूल की जाए।सूत्रों के अनुसार, यदि निष्पक्ष जांच होती है तो वन विभाग में वर्षों से चले आ रहे फर्जी कार्य, कागजी निर्माण और सरकारी धन की लूट की परतें खुल सकती हैं। अब देखना होगा कि राज्य सरकार इस गंभीर आरोप पर कितनी तेजी और सख्ती से कार्रवाई करती है, या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा। वहीं सर्वव्यापी इस पूरे प्रकरण की विस्तृत खबर अपने आगामी अंकों में प्रकाशित करेंगी।


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