तरुण कौशिक/ संपादक सर्वव्यापी/
छत्तीसगढ़ वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग में भ्रष्टाचार का एक बड़ा और चौंकाने वाला चेहरा सामने आ रहा है। विभाग के भीतर और बाहर चर्चाओं में एक ऐसे ‘सुपर दलाल’ का नाम उभर रहा है, जो कथित तौर पर पूरे प्रदेश में फैले वन परिक्षेत्रों, उपवन मंडलों और ठेकेदारी कार्यों से हर महीने करोड़ों रुपये की अवैध वसूली कर रहा है।सूत्रों के अनुसार यह दलाल विभाग के कुछ भ्रष्ट अधिकारियों और अफसरों के संरक्षण में काम कर रहा है। आरोप है कि कई जिम्मेदार अधिकारी इस नेटवर्क को बनाए रखने के लिए हर महीने 8 से 10 लाख रुपये तक की ‘मंथली’ दे रहे हैं, ताकि पदस्थापना, भुगतान, फाइल पास और ठेके से जुड़े काम बिना किसी बाधा के चलते रहें।बताया जा रहा है कि लकड़ी परिवहन, वृक्षारोपण योजनाएं, वन मार्ग निर्माण, सामग्री खरीदी, मजदूरी भुगतान और ठेकों के आवंटन जैसे कार्यों में यह दलाल मध्यस्थ बनकर अवैध वसूली करता है। जिन अधिकारियों और कर्मचारियों ने विरोध करने की कोशिश की, उन्हें या तो किनारे कर दिया गया या फिर दबाव में ला दिया गया।सबसे गंभीर सवाल यह है किवह दलाल कौन है?किसके संरक्षण में वह पूरे विभाग को बंधक बनाए हुए है?क्या शीर्ष स्तर तक इस अवैध वसूली की जानकारी नहीं है, या जानबूझकर आंखें मूंदी गई हैं?प्रदेश में “पर्यावरण संरक्षण” और “हरित विकास” की बात करने वाला विभाग यदि खुद भ्रष्टाचार की आग में झुलस रहा है, तो यह शासन और प्रशासन दोनों के लिए खतरनाक संकेत है। अब जरूरत है कि मुख्यमंत्री स्तर पर उच्चस्तरीय जांच, प्रवर्तन एजेंसियों की सक्रियता और दोषियों पर कठोर कार्रवाई हो, ताकि वन विभाग को दलाल-राज और भ्रष्टाचार से मुक्त कराया जा सके।जनता जानना चाहती है,क्या इस ‘सुपर दलाल’ का सच सामने आएगा, या फाइलों के जंगल में यह मामला भी दबा दिया जाएगा?