राशन के नाम पर जबरन वसूली! तिफरा में गरीबों से मसाले खरीदने की मजबूरी, खाद्य विभाग बना मूकदर्शक।

Share Now

तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी

शहर से लगे तिफरा नगर में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के तहत संचालित सरकारी राशन दुकानों में गंभीर अनियमितताओं और शोषण का मामला उजागर हुआ है। यहां राशनकार्ड धारकों को उनके हक का अनाज देने के बदले जबरन धनिया, मिर्च-मसाला, हल्दी जैसी अतिरिक्त सामग्री खरीदने के लिए मजबूर किया जा रहा है। यह पूरा खेल खुलेआम चल रहा है, लेकिन जिम्मेदार खाद्य विभाग अब तक इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर पाया है।स्थानीय हितग्राहियों का आरोप है कि राशन दुकानों के संचालक स्पष्ट रूप से यह कह देते हैं कि यदि साथ में मसाले या अन्य सामग्री नहीं ली गई, तो राशन नहीं दिया जाएगा। कई मामलों में हितग्राहियों को घंटों लाइन में खड़ा रहने के बाद भी राशन से वंचित कर दिया जाता है। मजबूरी में गरीब परिवार अतिरिक्त खर्च उठाकर इन सामग्रियों को खरीदने को विवश हैं।सरकार द्वारा संचालित राशन व्यवस्था का उद्देश्य गरीब और जरूरतमंद परिवारों को सस्ती दरों पर खाद्यान्न उपलब्ध कराना है, लेकिन तिफरा में यह व्यवस्था ही शोषण का माध्यम बन गई है। दिहाड़ी मजदूर और निम्न आय वर्ग के लोग, जो पहले ही आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं, अब उन्हें अनावश्यक वस्तुओं पर भी पैसा खर्च करना पड़ रहा है।इस पूरे मामले की शिकायत कई बार खाद्य विभाग के अधिकारियों से की जा चुकी है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि अब तक न तो किसी प्रकार की जांच शुरू हुई है और न ही दोषी राशन दुकान संचालकों पर कोई कार्रवाई की गई है। विभाग की इस उदासीनता से यह सवाल उठने लगा है कि क्या अधिकारियों की मिलीभगत से यह खेल चल रहा है, या फिर शिकायतों को जानबूझकर नजरअंदाज किया जा रहा है।तिफरा क्षेत्र के लोगों में इस मामले को लेकर भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि यदि जल्द ही इस समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे। यह मामला अब सिर्फ राशन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही और व्यवस्था की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े कर रहा है।स्थानीय नागरिकों ने जिला प्रशासन और संबंधित अधिकारियों से मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी राशन दुकान संचालकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि गरीबों को उनके अधिकार से वंचित न होना पड़े।अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस गंभीर मुद्दे पर कब तक चुप्पी साधे रहता है और कब गरीबों को इस जबरन वसूली से राहत मिलती है।


Share Now

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You cannot copy content of this page

error: Content is protected !!