21 दिन का वादा, 45 दिन का इंतज़ार: बिलासपुर में गैस एजेंसियों की मनमानी से उपभोक्ता बेहाल।

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तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी

केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू और उप मुख्यमंत्री अरुण साव के कर्मस्थल बिलासपुर जिले में रसोई गैस आपूर्ति व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। शासन के दावों और जमीनी हकीकत के बीच बड़ा अंतर सामने आ रहा है, जिससे आम उपभोक्ता परेशान और आक्रोशित नजर आ रहे हैं।शासन स्तर पर लगातार यह दावा किया जा रहा है कि गैस सिलेंडर की कोई कमी नहीं है और उपभोक्ता 21 दिन के भीतर आसानी से अगली बुकिंग कर सकते हैं। लेकिन हकीकत इससे बिल्कुल उलट दिखाई दे रही है। जिले के कई उपभोक्ताओं का कहना है कि 25 दिन तो छोड़िए, डेढ़ महीने बीत जाने के बाद भी गैस सिलेंडर की ऑनलाइन बुकिंग संभव नहीं हो पा रही है।उपभोक्ताओं के मुताबिक, जैसे ही वे गैस बुकिंग का प्रयास करते हैं, उनके मोबाइल पर बार-बार “24 घंटे बाद पुनः प्रयास करें” का संदेश आ रहा है। यह सिलसिला लगातार जारी है, जिससे लोग मानसिक रूप से परेशान हो चुके हैं। कई परिवारों की रसोई व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो गई है।स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि गैस एजेंसियां जानबूझकर बुकिंग प्रक्रिया को बाधित कर रही हैं, जिससे उपभोक्ताओं को ब्लैक में या अतिरिक्त शुल्क देकर सिलेंडर लेने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। हालांकि इस आरोप की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन लगातार मिल रही शिकायतें व्यवस्था की पारदर्शिता पर सवाल जरूर खड़े कर रही हैं।विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तकनीकी समस्या है तो उसे तत्काल दूर किया जाना चाहिए, और यदि एजेंसियों की लापरवाही है तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग की भूमिका भी इस पूरे मामले में कटघरे में है, क्योंकि अब तक इस समस्या का कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया है।जनता का सवाल सीधा है कि जब सरकार कह रही है कि गैस की कोई कमी नहीं है, तो आखिर उपभोक्ताओं को 45 दिन तक इंतजार क्यों करना पड़ रहा है?अब देखना होगा कि जिला प्रशासन और संबंधित विभाग इस गंभीर समस्या को कितनी गंभीरता से लेते हैं, या फिर आम जनता यूं ही सिस्टम की खामियों के बीच पिसती है।


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