तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी

अभी के बखत पूरा दुनिया मं मुस्लिम समाज के सबसे पवित्र महीना रमजान चलत हे। ये महीना सिरिफ रोजा रखे के परंपरा नई, बल्कि आत्मा के सुधारे, सबर, दया अऊ इंसानियत के भाव ला मजबूत करे के एक बहुतेच महत्त्वपूर्ण मौका आय।रमजान के महिना मं हर मुसलमान बिहान सहरी लेके सांझ इफ्तार तक रोजा रखथे। ये रोजा सिरिफ भूख-पियास सहना नई, बल्कि अपन मन, सोच अऊ व्यवहार ला भी नियंत्रण मं रखे के साधना आय। ये बखत मं मनखे अपन भीतर के गुस्सा, लालच, झूठ अऊ बुराई मन ले दूर रहिके, अपन चरित्र ला नवा रूप देय के कोसिस करथे।रमजान के खास बात ये घलो आय के एही महिना मं इस्लाम धर्म के पवित्र किताब कुरआन के अवतरण होय रहिस। एही से ये महीना इबादत, तिलावत अऊ अल्लाह के याद मं डूबे रहय के महिना माने जाथे। मस्जिद मन मं नमाज अऊ तरावीह के खास इंतजाम होथे, जिहां लोगन एकजुट होके भक्ति मं लीन हो जाथें।रोजा के सुरुवात सहरी ले होथे अऊ सांझ मं इफ्तार के संग टूटथे। इफ्तार मं खजूर, पानी अऊ कई किसिम के पकवान रहिथे, फेर रमजान के असली सार खाय-पियाय मं नई, बल्कि अपन मन अऊ आत्मा के सुधार मं हे।ए महीना मं जकात अऊ सदका के खास महत्त्व रहिथे। गरीब, जरूरतमंद अऊ लाचार मन के मदद करना, ओमन संग अपन खुशी बांटना – येच रमजान के सच्चा भावना आय। एही से समाज मं भाईचारा, एकता अऊ प्रेम के माहौल बन जाथे, जऊन आज के समय मं बहुते जरूरी होगे हवय।रमजान के आखिरी दिन मन अऊ घलो पवित्र माने जाथे, जिहां शब-ए-कद्र जइसन खास रात आवत हे। ए रात ला हजार महीना ले घलो बढ़िया माने जाथे, अऊ ए दिन-रात मं इबादत करे ले विशेष पुण्य मिलथे। रमजान के समापन मं ईद-उल-फितर के त्योहार मनाय जाथे, जऊन खुशी, मेल-मिलाप अऊ भाईचारा के प्रतीक आय।आज के भागदौड़ भरे जिनगी मं, जिहां मनखे भीतर ले थक गे हवय, रमजान हमन ला रुकके अपन आप ला समझे, आत्मचिंतन करे अऊ इंसानियत के असली मोल ला अपनाय के संदेश देथे। ये महीना हमन ला सिखाथे के असली अमीरी धन-दौलत मं नई, बल्कि दिल के साफगी अऊ दूसर मन संग खुशी बांटे मं हे।रमजान सिरिफ एक धार्मिक परंपरा नई, बल्कि जिनगी ला सही दिशा देय के एक सुनहरा अवसर आय। ये हमन ला प्रेरित करथे के हमन अपन भीतर के बुराई मन ला छोड़के, अच्छाई, प्रेम अऊ करुणा के रद्दा मं आगू बढ़न।सर्वव्यापी परिवार के ओर ले सब्बो मुस्लिम भाई-बहिनी मन ला पवित्र रमजान महीना के हार्दिक बधाई अऊ शुभकामना।