गौरेला-पेंड्रा-मरवाही,नूर मोहम्मद, ब्यूरो चीफ सर्वव्यापी
जनपद पंचायत गौरेला से सामने आई यह तस्वीर न सिर्फ शर्मनाक है, बल्कि प्रशासनिक संवेदनहीनता की पराकाष्ठा भी उजागर करती है। देश के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा को जिस तरह कचरे और बेकार सामान के बीच फेंक दिया गया है, वह पूरे सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े करता है।सभा हाल के मरम्मत कार्य के दौरान जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों ने मर्यादा, सम्मान और राष्ट्र की भावना—तीनों को ताक पर रख दिया। तस्वीर में साफ देखा जा सकता है कि गांधी जी की प्रतिमा बोरी, टूटे बोर्ड और कबाड़ के ढेर के बीच धूल फांक रही है। यह नजारा सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि राष्ट्र के प्रतीकों के प्रति गहरी उपेक्षा और अपमान का प्रतीक है।सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रशासन के जिम्मेदारों के भीतर जरा भी संवेदनशीलता बाकी नहीं रही? क्या मरम्मत कार्य के नाम पर राष्ट्रपिता का यह अपमान जायज ठहराया जा सकता है? जिन गांधी जी ने देश को सत्य, अहिंसा और सम्मान का पाठ पढ़ाया, आज उन्हीं की प्रतिमा इस तरह बेआबरू पड़ी है।स्थानीय लोगों में इस घटना को लेकर भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि यदि यही हाल राष्ट्रपिता के सम्मान का है, तो आम जनता के सम्मान की कल्पना ही व्यर्थ है।अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस गंभीर मामले पर क्या कार्रवाई करता है, क्या जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई होगी या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा?