बेटियों ने निभाया अंतिम कर्तव्य, परंपराओं को तोड़ रची मिसाल।

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तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी

बिलासपुर जिले के ग्राम परसाही में एक भावुक और प्रेरणादायक दृश्य देखने को मिला, जहां सामाजिक रूढ़ियों को पीछे छोड़ते हुए दो बेटियों ने अपनी मां को मुखाग्नि देकर समाज के सामने एक नई मिसाल पेश की।ग्राम परसाही निवासी 70 वर्षीय भूरी चौहान (पति स्व. बलदाऊ चौहान) का निधन हो गया। उनके कोई पुत्र नहीं थे, केवल दो बेटियां—जानकी चौहान और रानी चौहान—ही उनका सहारा थीं। मां के निधन के बाद जहां अक्सर ऐसी परिस्थितियों में परंपराओं का हवाला देकर बेटियों को पीछे कर दिया जाता है, वहीं जानकी और रानी ने साहस दिखाते हुए स्वयं अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी उठाई।दोनों बेटियों ने न केवल अपनी मां को कंधा दिया, बल्कि पूरे विधि-विधान के साथ मुखाग्नि देकर अंतिम संस्कार भी संपन्न किया। यह दृश्य न केवल भावुक कर देने वाला था, बल्कि समाज के बदलते स्वरूप की भी झलक प्रस्तुत करता है।इस दौरान गांव के लोगों ने भी पुरानी मान्यताओं से ऊपर उठकर बेटियों का साथ दिया। बड़ी संख्या में ग्रामीण अंतिम यात्रा में शामिल हुए और बेटियों के इस साहसिक कदम का समर्थन किया।कार्यक्रम में सरपंच प्रतिनिधि जितेंद्र कमलेश, पार्षद रेखा बेदराम सूर्यवंशी और मोहन श्रीवास सहित अनेक ग्रामीण उपस्थित रहे।ग्रामीणों ने इस पहल को समाज में समानता, नारी सम्मान और सकारात्मक बदलाव की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। यह घटना इस बात का प्रमाण है कि अब बेटियां भी हर जिम्मेदारी निभाने में सक्षम हैं,चाहे वह जीवन का कोई भी पड़ाव क्यों न हो।


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