विकास नंद/ सर्वव्यापी/
छत्तीसगढ़ में महिलाओं को त्वरित न्याय दिलाने और उनके संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के उद्देश्य से आयोजित “महा जन-सुनवाई सप्ताह” का सफल समापन हो गया। 09 मार्च से 13 मार्च 2026 तक चले इस विशेष अभियान में राज्य के सभी 33 जिलों को कवर करते हुए 5 संभागों में सुनवाई की गई।छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग द्वारा आयोजित इस पहल में कुल 749 प्रकरणों की सुनवाई की गई, जिनमें से 270 प्रकरणों का मौके पर ही निराकरण कर दिया गया।
इस दौरान कुल 2,712 पक्षकारों में से 1,707 की उपस्थिति दर्ज की गई, जो इस पहल की प्रभावशीलता को दर्शाता है। कुल औसत निराकरण दर 36.05 प्रतिशत रही।
आयोग की अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक एवं सदस्यगण सरला कोसरिया, ओजस्वी मंडावी और दीपिका सोरी की उपस्थिति में विशेष न्यायपीठों के माध्यम से सुनवाई की गई। इस पहल का उद्देश्य संभाग स्तर पर ही मामलों का समाधान कर महिलाओं को न्याय की मुख्यधारा से जोड़ना था।
संभागवार स्थिति
सबसे अधिक प्रकरण रायपुर संभाग में सामने आए, जहां 292 मामलों में से 148 का निराकरण किया गया। वहीं दुर्ग संभाग में 113 में से 41, सरगुजा में 101 में से 31, बिलासपुर में 157 में से 29 और बस्तर संभाग में 86 में से 21 प्रकरणों का समाधान किया गया।रायपुर जिला सबसे आगे रहा, जहां 199 में से 115 मामलों का निराकरण हुआ, जबकि धमतरी में 58.33 प्रतिशत के साथ सबसे बेहतर निराकरण दर दर्ज की गई।
सामूहिक प्रयास से सफलता
इस वृहद आयोजन को सफल बनाने में आयोग के सचिव रमेश साहू के मार्गदर्शन सहित लगभग 250 अधिकारियों और कर्मचारियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। महिला एवं बाल विकास विभाग, जिला पुलिस प्रशासन और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के शासकीय वकीलों का भी सराहनीय सहयोग रहा।
महिलाओं को मिला भरोसा
महा जन-सुनवाई सप्ताह ने न केवल लंबित मामलों के निराकरण में गति दी, बल्कि महिलाओं में न्याय प्रणाली के प्रति विश्वास भी मजबूत किया। यह पहल प्रदेश में महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुई।