तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी

बिलासपुर संभाग अंतर्गत गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में कथित भ्रष्टाचार के मामलों पर लगातार शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं होने से परेशान एक शिकायतकर्ता श्रीराम भारत सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष महर्षि गौतम ने अब न्यायपालिका का दरवाजा खटखटाया है। इन्होंने छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा को पत्र लिखकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।जानकारी के अनुसार, गौरेला -पेंड्रा-मरवाही जिले में विभिन्न विभागों, खासकर वन विभाग में हुए भ्रष्टाचार को लेकर दर्जनों शिकायतें उच्च अधिकारियों, मंत्रियों और मुख्यमंत्री तक पहुंचाई गईं। बावजूद इसके अब तक किसी भी प्रकार की ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। आरोप है कि जिन अधिकारियों के पास जांच की जिम्मेदारी है, वही खुद इन मामलों में संलिप्त हैं, जिसके चलते शिकायतों को दबा दिया जाता है या औपचारिक जांच कर मामले को रफा-दफा कर दिया जाता है।पीड़ित का कहना है कि ऊपर से जांच के लिए आने वाली शिकायतों की प्रतियां भी संबंधित अधिकारी अपने पास ही रोक लेते हैं या अपने अधीनस्थ कर्मचारियों से जांच कराकर मामले को खत्म कर देते हैं। इससे न केवल भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिल रहा है, बल्कि आम जनता का विश्वास भी प्रशासन से उठता जा रहा है।शिकायत में विशेष रूप से वन विभाग में “लैंटाना उन्मूलन” योजना के नाम पर बड़े पैमाने पर गड़बड़ी का आरोप लगाया गया है। इसमें तत्कालीन डीएफओ, एसडीओ और अन्य अधिकारियों पर विकास कार्यों के नाम पर करोड़ों रुपये के गबन का आरोप है। शिकायतकर्ता ने संबंधित अधिकारियों के नाम भी उल्लेखित करते हुए उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।आम जनता और शिकायतकर्ता की ओर से यह भी मांग की गई है कि इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए, दोषियों से 200 करोड़ रुपये से अधिक की कथित गबन राशि की वसूली की जाए तथा उनकी अचल संपत्तियों को जब्त किया जाए।अब यह देखना अहम होगा कि मुख्य न्यायाधीश को भेजे गए इस पत्र के बाद मामले में क्या रुख अपनाया जाता है और क्या पीड़ित को न्याय मिल पाता है या नहीं।