ढीला प्रशासन, कमजोर होती पकड़: क्या अफसरशाही पर लगाम कस पाएंगे विष्णु देव साय?

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तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी

छत्तीसगढ़ में इन दिनों प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। जिला स्तर के अधिकारी अब राज्य स्तर से जारी आदेशों को नजरअंदाज करते हुए अपनी मनमर्जी से काम कर रहे हैं। यह स्थिति शासन की पकड़ को कमजोर करती नजर आ रही है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में बनी सरकार के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती प्रशासनिक कसावट लाने की बन गई है।प्रदेश में लगातार ऐसे मामले सामने आ रहे हैं, जहां उच्च स्तर से दिए गए निर्देशों का पालन नहीं किया जा रहा। चाहे वह वित्तीय भुगतान से जुड़े मुद्दे हों या भ्रष्टाचार की शिकायतों की जांच—जिला प्रशासन की उदासीनता साफ झलक रही है। इससे यह संदेश जा रहा है कि शासन के आदेश अब महज कागजी कार्रवाई बनकर रह गए हैं।प्रशासनिक सूत्रों की मानें तो कई विभागों में अधिकारी अपने वरिष्ठों के निर्देशों को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। इससे न केवल कार्यों में देरी हो रही है, बल्कि शासन की प्राथमिकताओं पर भी असर पड़ रहा है। जनता के हित में बनाई गई योजनाएं जमीन पर उतरने से पहले ही फाइलों में अटक जाती हैं।इस स्थिति का सबसे बड़ा नुकसान आम जनता को उठाना पड़ रहा है। लोग अपनी समस्याओं को लेकर दफ्तरों के चक्कर काटते रहते हैं, लेकिन समाधान नहीं मिल पाता। शिकायतों के निराकरण में देरी अब आम बात हो गई है, जिससे लोगों में असंतोष बढ़ता जा रहा है।राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यदि समय रहते इस स्थिति को नहीं सुधारा गया, तो इसका सीधा असर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की छवि पर पड़ेगा। सरकार की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि उसकी योजनाएं जमीनी स्तर पर कितनी प्रभावी हैं, और फिलहाल यही कड़ी कमजोर नजर आ रही है।वहीं विपक्ष भी इस मुद्दे को लेकर सरकार पर हमलावर हो सकता है। प्रशासनिक लापरवाही और आदेशों की अवहेलना जैसे मुद्दे चुनावी माहौल में बड़ा रूप ले सकते हैं। यदि यही स्थिति बनी रही, तो आगामी चुनावों में यह सरकार के लिए चुनौती बन सकती है।प्रदेश के कई हिस्सों से यह शिकायत भी सामने आ रही है कि अधिकारी जनता की समस्याओं को गंभीरता से नहीं ले रहे। कई मामलों में तो शिकायत दर्ज होने के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती। इससे शासन के प्रति भरोसा कमजोर पड़ रहा है।अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या मुख्यमंत्री विष्णु देव साय इस ढीले पड़ते प्रशासनिक तंत्र पर लगाम कस पाएंगे? क्या अफसरशाही पर सख्ती दिखाते हुए जवाबदेही तय की जाएगी?जरूरत इस बात की है कि शासन स्तर पर कड़े निर्देशों के साथ-साथ उनकी मॉनिटरिंग भी सुनिश्चित की जाए। अधिकारियों की जवाबदेही तय हो और लापरवाही बरतने वालों पर सख्त कार्रवाई हो, तभी प्रशासन में सुधार संभव है।यदि समय रहते सुधार नहीं किया गया, तो यह स्थिति सरकार के लिए राजनीतिक रूप से नुकसानदायक साबित हो सकती है। जनता की उम्मीदें सरकार से जुड़ी होती हैं, और उन उम्मीदों पर खरा उतरना ही किसी भी सरकार की असली परीक्षा होती है।


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