गौरेला-पेंड्रा-मरवाही,नूर मोहम्मद, ब्यूरो चीफ सर्वव्यापी
छत्तीसगढ़ का मरवाही वनमंडल एक बार फिर गंभीर आरोपों के घेरे में है। विश्वस्त सूत्रों के अनुसार, यहां वर्षों से योजनाओं के नाम पर बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार और अनियमितताओं का खेल जारी है। हालात ऐसे बन चुके हैं कि यह वनमंडल पूरे प्रदेश में घोटालों और वित्तीय अनियमितताओं के लिए चर्चित हो गया है।सूत्रों का दावा है कि मरवाही वनमंडल कुछ चुनिंदा वनकर्मियों और अधिकारियों के लिए “सुरक्षित चारागाह” बन चुका है, जहां योजनाएं आती तो हैं, लेकिन उनका क्रियान्वयन कागजों तक ही सीमित रह जाता है। जमीनी स्तर पर कार्य नगण्य है, जबकि सरकारी राशि का पूरा उपयोग दर्शाकर निकाल लिया जाता है।कैम्पा, नरवा और ग्रीन क्रेडिट—सबमें गड़बड़ी के आरोपविभागीय सूत्रों के मुताबिक, सबसे अधिक अनियमितताएं कैम्पा मद, लेंटाना उन्मूलन परियोजना, नरवा विकास योजना और ग्रीन क्रेडिट योजना में सामने आई हैं। आरोप है कि वर्ष 2018 से 2025 के बीच नरवा विकास और लेंटाना उन्मूलन के नाम पर वास्तविक कार्य नहीं हुआ, लेकिन कागजों में राशि आहरित कर ली गई।ग्रीन क्रेडिट योजना में भी भारी गड़बड़ी के आरोप हैं। सूत्रों का कहना है कि इस योजना में डीएफओ स्तर से लेकर रेंजर, डिप्टी रेंजर, फॉरेस्ट गार्ड, कार्यालयीन स्टाफ और सप्लायर फर्मों तक की मिलीभगत से पूरे प्रोजेक्ट को प्रभावित किया गया।पौधारोपण में फर्जीवाड़ा, मनरेगा पौधों का उपयोगविश्वस्त सूत्रों के अनुसार, योजना की शुरुआत से ही फर्जीवाड़ा किया गया। पौध तैयार करने के नाम पर कूट रचना कर वास्तविक तैयारी नहीं की गई। इसके बजाय केंद्रीय नर्सरी—चिचगोहना, सदवानी और इंद्रा उद्यान में मनरेगा के तहत तैयार पौधों को ही 500 हेक्टेयर रोपण क्षेत्र में लगा दिया गया, जबकि प्रस्तावित “टाल प्लांट” पौधों का उपयोग होना था।आरोप है कि टाल प्लांट की तैयारी और सामग्री क्रय के नाम पर राशि का फर्जी आहरण किया गया।अयोग्य भूमि पर रोपण, 70% पौधे गायबसूत्रों का यह भी कहना है कि रोपण के लिए अनुपयुक्त, पथरीले और उबड़-खाबड़ क्षेत्रों को चयनित किया गया। न तो गुणवत्तायुक्त आरसीसी पोल लगाए गए, न वायर फेंसिंग हुई, न खाद-मिट्टी का समुचित उपयोग और न ही सिंचाई की व्यवस्था की गई।नतीजतन, वर्तमान स्थिति में लगभग 70 प्रतिशत पौधे नष्ट या गायब बताए जा रहे हैं।जांच हुई, लेकिन कार्रवाई नहींसूत्रों के अनुसार, इस पूरे मामले में दर्जनों शिकायतें की गईं और कुछ जांच भी हुईं। कई मामलों में शिकायतें सही भी पाई गईं, लेकिन अब तक किसी ठोस कार्रवाई का अभाव है। आरोप है कि कमीशनखोरी के चलते जांच भी प्रभावित हो रही है और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हो पा रही।कई अधिकारी-कर्मचारी घेरे मेंसूत्रों के हवाले से बताया जा रहा है कि इस कथित घोटाले में तत्कालीन और वर्तमान वनमंडल अधिकारियों सहित एसडीओ, रेंजर, नर्सरी प्रभारी, शाखा प्रभारी और अन्य फील्ड स्टाफ की भूमिका संदिग्ध बताई जा रही है।स्वतंत्र जांच की मांग तेजजागरूकता मंच जीपीएम सहित स्थानीय संगठनों ने पूरे मामले की स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने की मांग की है। मांग है कि राजस्व या पुलिस विभाग से निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषियों पर कठोर कार्रवाई करते हुए सरकारी राशि की वसूली की जाए।नोट: यह समाचार विभागीय एवं विश्वस्त सूत्रों से प्राप्त जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है। आधिकारिक पुष्टि एवं जांच रिपोर्ट के बाद तथ्यों में परिवर्तन संभव है।