शोक की छाया में भी संगठन धर्म निभा रहे विधायक धरम लाल कौशिक।

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तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी

छत्तीसगढ़ विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष एवं भाजपा के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष, वर्तमान बिल्हा विधायक धरम लाल कौशिक इन दिनों गहरे व्यक्तिगत शोक से गुजर रहे हैं। उनके बड़े भाई स्वर्गीय भुलऊ राम कौशिक के निधन के बाद पूरे परिवार सहित क्षेत्र में शोक का माहौल व्याप्त है।धरम लाल कौशिक के गृह नगर परसदा बिलासपुर में प्रदेश के विभिन्न राजनीतिक दलों के वरिष्ठ नेताओं, मंत्रियों और जनप्रतिनिधियों का लगातार आगमन हो रहा है। सभी नेता दिवंगत भुलऊ राम कौशिक को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए शोक संतप्त परिवार को सांत्वना दे रहे हैं।वहीं शोक की इस घड़ी में भी धरम लाल कौशिक का सार्वजनिक जीवन के प्रति समर्पण देखने को मिल रहा है। व्यक्तिगत दुःख के बावजूद वे भारतीय जनता पार्टी के संगठनात्मक दायित्वों का निर्वहन करते हुए बिलासपुर जिले में आयोजित विभिन्न बैठकों में सहभागिता निभा रहे हैं।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह उनके अनुशासन, कार्यनिष्ठा और संगठन के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक है। एक ओर जहां वे अपने बड़े भाई के निधन से व्यथित हैं, वहीं दूसरी ओर पार्टी संगठन को मजबूत करने की दिशा में सक्रिय बने हुए हैं।परसदा में लगातार पहुंच रहे जनप्रतिनिधियों और आम नागरिकों की भीड़ इस बात का प्रमाण है कि कौशिक परिवार का सामाजिक और राजनीतिक प्रभाव व्यापक है। क्षेत्रीय जनता दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करते हुए परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त कर रही है।वहीं शोक और कर्तव्य के इस संतुलन ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि सार्वजनिक जीवन में कार्यरत व्यक्तियों के लिए निजी भावनाओं के साथ-साथ सामाजिक जिम्मेदारियों का निर्वहन भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है।


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