विकास नंद/ सर्वव्यापी/
भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया है। ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के लागू होने के साथ अब देश की आधी आबादी को राजनीतिक निर्णय प्रक्रिया में मजबूत और निर्णायक भागीदारी मिलने जा रही है। इस ऐतिहासिक पहल पर सामाजिक कार्यकर्ता सरला कोसरिया ने इसे “नए भारत के निर्माण की मजबूत आधारशिला” बताया है।उन्होंने कहा कि लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33% आरक्षण मिलने से न केवल राजनीतिक संतुलन स्थापित होगा, बल्कि समाज के जमीनी मुद्दों को भी नई दिशा मिलेगी। यह अधिनियम महिलाओं के वर्षों के संघर्ष, समर्पण और योगदान का सम्मान है।
🟦 राष्ट्र निर्माण में महिलाओं की बढ़ेगी भागीदारीसरला कोसरिया ने कहा कि अब तक नीति-निर्माण में महिलाओं की भागीदारी सीमित रही, जबकि वे देश की लगभग 50% आबादी हैं। इस कानून के लागू होने से महिलाएं शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण और सामाजिक न्याय जैसे मुद्दों पर अधिक प्रभावी ढंग से अपनी आवाज रख सकेंगी।
🟩 अधिनियम के प्रमुख उद्देश्यसमावेशी नीति-निर्माण: महिलाओं की संवेदनशीलता से नीतियां अधिक प्रभावी बनेंगी।लैंगिक समानता को बढ़ावा: भारत वैश्विक स्तर पर एक मजबूत उदाहरण प्रस्तुत करेगा।महिलाओं के नेतृत्व में विकास: देश ‘Women-Led Development’ की दिशा में आगे बढ़ेगा।
🟨 क्या होंगे बड़े बदलाव?नेतृत्व का लोकतंत्रीकरण: गांव से संसद तक महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित होगी।राजनीतिक पारदर्शिता: महिलाओं की भागीदारी से जवाबदेही और शुचिता बढ़ेगी।सशक्त समाज की ओर कदम: महिलाओं का आत्मविश्वास और निर्णय क्षमता बढ़ेगी।
🟪 मुख्य प्रावधानलोकसभा व विधानसभाओं में 33% सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित15 वर्षों तक लागू रहने का प्रावधानरोटेशन प्रणाली के तहत अलग-अलग क्षेत्रों को अवसरअंत में सरला कोसरिया ने कहा कि “यह अधिनियम केवल एक कानून नहीं, बल्कि देश की बेटियों के सपनों को साकार करने का माध्यम है। अब महिलाएं केवल मतदाता नहीं, बल्कि देश की नीति निर्माता बनेंगी।