रुक्मिणी-विवाह की अलौकिक झांकी और सुदामा चरित्र की करुणा—महासमुंद में श्रीमद् भागवत कथा का भव्य समापन।

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विकास नंद /सर्वव्यापी

वार्ड क्रमांक 23, पंजाबी पारा स्थित एक निज निवास में 21 अप्रैल से प्रारंभ श्रीमद् भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ सप्ताह का 28 अप्रैल मंगलवार को अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ भव्य समापन हुआ। पूरे सप्ताह चले इस आध्यात्मिक आयोजन ने क्षेत्र को भक्तिमय वातावरण में सराबोर कर दिया।कथा के अंतिम दिनों में कथा व्यास आचार्य नारायण दास वैष्णव जी ने भगवान श्रीकृष्ण और रुक्मिणी के दिव्य विवाह प्रसंग का अत्यंत भावपूर्ण वर्णन किया। विवाहोत्सव की भांति सजे पंडाल में श्रद्धालुओं ने पुष्प वर्षा कर भगवान के पावन मिलन का स्वागत किया। रुक्मिणी हरण से लेकर द्वारका में संपन्न विवाह की कथा ने सभी को भाव-विभोर कर दिया। आचार्य जी ने इसे जीवात्मा और परमात्मा के मिलन का प्रतीक बताते हुए भक्ति का गूढ़ संदेश दिया।एकादशी के दिन सुदामा चरित्र का मार्मिक वर्णन सुनकर श्रद्धालुओं की आंखें नम हो उठीं। श्रीकृष्ण और सुदामा की निष्कलुष मित्रता, तंदुल की भेंट और भगवान की कृपा का प्रसंग हर किसी के हृदय को छू गया। आचार्य जी ने बताया कि सच्चा प्रेम, त्याग और समर्पण ही ईश्वर तक पहुंचने का सरल मार्ग है।द्वादशी तिथि पर वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हवन-पूर्णाहुति सम्पन्न हुई, जिसमें यजमान दंपतियों ने सुख-शांति, समृद्धि और विश्व कल्याण की कामना की। इसके पश्चात श्रीमद्भगवद्गीता के उपदेश, तुलसी वर्षा, कपिला तर्पण एवं महाप्रसादी वितरण के साथ कार्यक्रम पूर्ण हुआ।समापन अवसर पर निकली भव्य शोभायात्रा ने पूरे क्षेत्र को भक्तिरस में डुबो दिया। भजन-कीर्तन और जयघोष के बीच श्रद्धालु झूमते-गाते नजर आए। विशाल भंडारे में हजारों लोगों ने महाप्रसादी ग्रहण कर पुण्य लाभ अर्जित किया।यह आयोजन 21 अप्रैल को रामेश्वरी मंदिर से निकली भव्य कलश यात्रा के साथ प्रारंभ हुआ था, जिसमें प्रतिदिन कथा, पूजन और विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान संपन्न होते रहे। आयोजन को विधि-विधान से सम्पन्न कराने में पंडित हेमंत दास वैष्णव (महासमुंद) एवं पंडित सूरज दास वैष्णव (चिंगरौद) की महत्वपूर्ण भूमिका रही।आयोजनकर्ता श्रीमती प्रेमशीला पोषण साहू एवं उनके परिवार ने सभी श्रद्धालुओं, सहयोगियों और क्षेत्रवासियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह आयोजन सभी के सहयोग, आस्था और समर्पण का प्रतिफल है।आचार्य नारायण दास वैष्णव जी ने अपने संदेश में कहा कि श्रीमद् भागवत कथा का श्रवण आत्मिक शुद्धि, भक्ति जागरण और जीवन के परम उद्देश्य की ओर अग्रसर करने वाली दिव्य साधना है, जो हर श्रद्धालु के जीवन में शांति, श्रद्धा और आनंद का संचार करती है।


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