विकास नंद/ सर्वव्यापी

महासमुंद पुलिस ने एक बड़े आर्थिक अपराध का खुलासा करते हुए लगभग 1.5 करोड़ रुपये मूल्य की LPG गैस गबन मामले का पर्दाफाश किया है। यह पूरा मामला सुपुर्दनामे में सुरक्षित रखे गए 6 गैस कैप्सूल से करीब 100 मीट्रिक टन LPG गैस को अवैध रूप से निकालकर बेचने से जुड़ा है। इस मामले में ठाकुर पेट्रोकेमिकल कंपनी के मालिक, डायरेक्टर और प्लांट मैनेजर की भूमिका सामने आई है।
🔴 ऐसे हुआ पूरा खेल
पुलिस जांच के अनुसार, दिसंबर 2025 में जब्त किए गए 6 LPG कैप्सूल ट्रकों को सुरक्षा कारणों से 30 मार्च 2026 को सुपुर्दनामे में ठाकुर पेट्रोकेमिकल्स (उरला, अभनपुर) को सौंपा गया था। लेकिन सुपुर्दनामे के बाद 31 मार्च से 5 अप्रैल के बीच सुनियोजित तरीके से इन कैप्सूलों से गैस निकाल ली गई।31 मार्च: 2 कैप्सूल खाली1 अप्रैल: 1 कैप्सूल3 अप्रैल: 1 कैप्सूल5 अप्रैल: 2 कैप्सूलहर कैप्सूल से औसतन 15–17 टन गैस निकाली गई।
🔴 GPS से खुला राज
कैप्सूल में लगे GPS सिस्टम ने हर गतिविधि की सटीक जानकारी दी। जांच में पाया गया कि गैस प्लांट के अंदर स्टोरेज टैंक (बुलेट) और निजी टैंकरों में ट्रांसफर कर दी गई।
🔴 रिकॉर्ड में बड़ा घोटाला
जप्त दस्तावेजों से चौंकाने वाले तथ्य सामने आए—अप्रैल में केवल 47 टन गैस खरीदी गई लेकिन 107 टन गैस बेची गईयानी 60 टन गैस बिना खरीदी बेची गई (चोरी की गैस)कई लेन-देन कच्चे बिल और रजिस्टर में दर्ज किए गए, जिनमें से कुछ रिकॉर्ड गायब कर दिए गए हैं।
🔴 अवैध बिक्री और कालाबाजारी
जांच में सामने आया कि गैस की कमी के समय आरोपियों ने डेढ़ से दो गुना कीमत पर अवैध रूप से LPG बेची। रायपुर की कई एजेंसियों ने भी इस अवैध गैस की खरीद कर उसे बाजार में खपाने में सहयोग किया।
🔴 तौल में देरी से रची साजिश
सुपुर्दनामे के समय कैप्सूल का वजन नहीं कराया गया। इसका फायदा उठाकर 6 से 8 दिन के भीतर गैस निकाल ली गई और बाद में खाली कैप्सूल का वजन कर कूटरचित दस्तावेज तैयार किए गए।
🔴 लीकेज की थ्योरी खारिज विशेषज्ञ जांच में सभी कैप्सूल पूरी तरह सुरक्षित और लीकेज-फ्री पाए गए। रिपोर्ट के अनुसार इतनी बड़ी मात्रा में गैस का रिसाव होना तकनीकी रूप से असंभव है।
🔴 साक्ष्य मिटाने की कोशिश आरोपियों ने कंपनी के रजिस्टर, बिल और अन्य दस्तावेजों में छेड़छाड़ कर कई अहम रिकॉर्ड गायब कर दिए। पुलिस ने इस आधार पर साक्ष्य नष्ट करने की धाराएं भी जोड़ी हैं।
🔴 जब्ती और कार्रवाई पुलिस ने मौके से भारी मात्रा में सामग्री जब्त की, जिसमें LPG टैंकर, गैस सिलेंडर, कंप्यूटर, DVR और दस्तावेज शामिल हैं।
🔴 गिरफ्तार आरोपी निखिल वैष्णव (41 वर्ष), निवासी अभनपुर, रायपुर
🔴 धाराएं आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं सहित आवश्यक वस्तु अधिनियम और आईटी एक्ट के तहत मामला दर्ज कर जांच जारी है। मुख्य आरोपी फिलहाल फरार हैं।
👉 यह मामला न केवल आर्थिक अपराध का बड़ा उदाहरण है, बल्कि आवश्यक वस्तुओं की कालाबाजारी और सरकारी व्यवस्था के दुरुपयोग को भी उजागर करता है।