श्रमिकों के संग जमीन पर बैठकर भोजन, मुख्यमंत्री ने चखा बोरे बासी का स्वाद — पेयजल समस्या पर तुरंत दिए सख्त निर्देश।

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विकास नंद/सर्वव्यापी

सुशासन तिहार के तहत कबीरधाम जिले के ग्राम लोखान में एक बेहद आत्मीय और संवेदनशील दृश्य देखने को मिला, जब मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय निर्माणाधीन पंचायत भवन के औचक निरीक्षण के दौरान सीधे श्रमिकों के बीच पहुंच गए। यह दौरा केवल निर्माण कार्यों की समीक्षा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि आमजन के साथ उनके सहज जुड़ाव और संवेदनशील नेतृत्व का जीवंत उदाहरण बन गया।मुख्यमंत्री के अचानक पहुंचने से कार्यरत श्रमिकों में उत्साह का माहौल बन गया। निरीक्षण के दौरान महिला श्रमिकों ने बड़े स्नेह और आग्रह के साथ उन्हें दोपहर के भोजन के लिए आमंत्रित किया। इस सादगी भरे निमंत्रण को स्वीकार करते हुए मुख्यमंत्री ने मुस्कुराकर पूछा कि वे खाने में क्या लेकर आई हैं।महिलाओं ने बताया कि वे घर से पारंपरिक भोजन—बोरे बासी, पान पुरवा रोटी, चना भाजी, चरोटा भाजी, मुनगा बड़ी और आमा (आम) की चटनी लेकर आई हैं। यह सुनते ही मुख्यमंत्री ने उनके साथ जमीन पर बैठकर भोजन करने का निर्णय लिया। श्रमिकों के बीच बैठकर उनके टिफिन से ही भोजन करते हुए उन्होंने कहा कि यह भोजन उनकी संस्कृति और जीवनशैली से गहराई से जुड़ा हुआ है।भोजन के दौरान मुख्यमंत्री ने श्रमिक महिलाओं से संवाद करते हुए शासकीय योजनाओं के क्रियान्वयन का जमीनी फीडबैक भी लिया। उन्होंने महतारी वंदन योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना सहित अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं के लाभ के बारे में विस्तार से जानकारी ली। महिलाओं ने भी खुलकर अपने अनुभव साझा किए, जिससे योजनाओं की वास्तविक स्थिति सामने आई।जब गांव की समस्याओं पर चर्चा हुई, तो महिलाओं ने पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण पेयजल की गंभीर समस्या का मुद्दा उठाया। उन्होंने बताया कि बोरवेल और हैंडपंप लंबे समय तक कारगर नहीं रहते, जिससे गर्मी में पानी की किल्लत बढ़ जाती है।इस पर मुख्यमंत्री ने मौके पर ही कलेक्टर से जानकारी ली। बताया गया कि क्षेत्र के 26 गांवों के लिए एक विशेष पेयजल योजना तैयार है, जिसके तहत दूरस्थ जल स्रोतों से पाइपलाइन के माध्यम से पानी उपलब्ध कराया जाएगा।मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए कि इस योजना को तत्काल स्वीकृति देकर जमीन पर काम शुरू किया जाए, ताकि ग्रामीणों को जल्द राहत मिल सके। उन्होंने कहा कि सुशासन का असली अर्थ यही है कि योजनाएं समय पर और प्रभावी ढंग से लोगों तक पहुंचे।

मुख्यमंत्री का यह दौरा एक बार फिर इस बात का प्रमाण बना कि जब नेतृत्व जमीन से जुड़कर लोगों के बीच जाता है, तो न सिर्फ समस्याओं की सही पहचान होती है, बल्कि उनके समाधान की दिशा में भी तुरंत कदम उठाए जाते हैं।


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