सुशासन की नई परिभाषा गढ़ता “सुशासन तिहार”, जमीनी हकीकत जानने स्वयं मैदान में उतरे प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह..!

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तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी

छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में चल रहा “सुशासन तिहार” अब केवल एक सरकारी आयोजन नहीं, बल्कि प्रशासन और जनता के बीच विश्वास की मजबूत कड़ी बनता जा रहा है। इस बार इस अभियान की सबसे खास बात यह है कि मुख्यमंत्री के साथ-साथ उनके प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह स्वयं प्रदेश के विभिन्न जिलों में पहुंचकर व्यवस्थाओं का जायजा ले रहे हैं। यह पहल न केवल प्रशासनिक सक्रियता को दर्शाती है, बल्कि यह भी साबित करती है कि सरकार जमीनी स्तर पर समस्याओं के समाधान के लिए गंभीर है।सुशासन तिहार के माध्यम से सरकार ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि अब शिकायतें केवल फाइलों में सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि उनका त्वरित और प्रभावी निराकरण किया जाएगा। प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह की सक्रिय उपस्थिति इस पूरे अभियान को एक नई ऊर्जा दे रही है। वे हर जिले में जाकर न केवल अधिकारियों से संवाद कर रहे हैं, बल्कि आम जनता से सीधे मुलाकात कर उनकी समस्याओं को समझने का प्रयास भी कर रहे हैं।इस पूरे अभियान की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें पारदर्शिता और जवाबदेही को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। सुबोध कुमार सिंह द्वारा लगातार मॉनिटरिंग किए जाने से अधिकारियों में भी एक जिम्मेदारी का भाव देखने को मिल रहा है। वे हर शिकायत की स्थिति पर नजर रख रहे हैं और यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि किसी भी मामले में लापरवाही न बरती जाए।प्रदेश के विभिन्न जिलों में आयोजित हो रहे सुशासन तिहार में लोगों की भारी भागीदारी देखने को मिल रही है। ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर शहरी इलाकों तक लोग अपनी समस्याएं लेकर पहुंच रहे हैं और प्रशासन से सीधे संवाद स्थापित कर रहे हैं। इस दौरान प्राप्त हो रही शिकायतों का मौके पर ही समाधान करने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे लोगों में सरकार के प्रति विश्वास और मजबूत हो रहा है।प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह का यह जमीनी दौरा यह दर्शाता है कि वे केवल दफ्तरों तक सीमित अधिकारी नहीं हैं, बल्कि वे जनता की समस्याओं को समझने और उन्हें हल करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनके इस रवैये से प्रशासनिक तंत्र में भी एक सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। अधिकारी अब अधिक सक्रिय और संवेदनशील नजर आ रहे हैं।सुशासन तिहार के दौरान मांगों और शिकायतों के निराकरण की जो प्रक्रिया अपनाई जा रही है, वह अन्य राज्यों के लिए भी एक उदाहरण बन सकती है। इसमें तकनीक का उपयोग, पारदर्शिता और समयबद्ध समाधान पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। सुबोध कुमार सिंह द्वारा हर स्तर पर निगरानी रखने से यह सुनिश्चित हो रहा है कि कोई भी मामला लंबित न रहे।यह भी उल्लेखनीय है कि इस अभियान के माध्यम से सरकार केवल समस्याओं का समाधान ही नहीं कर रही, बल्कि विकास कार्यों की वास्तविक स्थिति का भी आंकलन कर रही है। प्रमुख सचिव स्वयं योजनाओं की प्रगति की समीक्षा कर रहे हैं और जहां कमी पाई जा रही है, वहां तुरंत सुधार के निर्देश दे रहे हैं।प्रदेश में सुशासन की इस पहल को लेकर आम जनता में सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। लोग इसे सरकार की गंभीरता और प्रतिबद्धता का प्रमाण मान रहे हैं। सुबोध कुमार सिंह की सक्रियता ने इस पूरे अभियान को और अधिक प्रभावी बना दिया है।अंततः यह कहा जा सकता है कि सुशासन तिहार के माध्यम से छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रशासनिक कार्यशैली में एक नया मानक स्थापित किया है। प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह की भूमिका इस पूरे अभियान में अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। उनकी निगरानी, सक्रियता और संवेदनशीलता ने यह साबित कर दिया है कि जब प्रशासन और सरकार मिलकर काम करते हैं, तो सुशासन केवल एक नारा नहीं, बल्कि एक साकार हकीकत बन जाता है।


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