तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी
राज्य सरकार ने प्रशासनिक कसावट और शिक्षा व्यवस्था में सुधार के अपने संकल्प को आगे बढ़ाते हुए एक अहम निर्णय लिया है। 2002 बैच के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी डॉ. कमलप्रीत सिंह को स्कूल शिक्षा विभाग का सचिव नियुक्त किया गया है। यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब प्रदेश में नई शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन, शैक्षणिक गुणवत्ता सुधार और स्कूलों के बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।डॉ. कमलप्रीत सिंह इससे पहले भी विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर अपनी कार्यकुशलता और परिणाममुखी कार्यशैली का परिचय दे चुके हैं। कांग्रेस सरकार के दौरान भी उन्होंने कई अहम जिम्मेदारियां संभालीं और प्रशासनिक अनुभव का व्यापक दायरा तैयार किया। अब भाजपा सरकार ने उन पर भरोसा जताते हुए शिक्षा जैसे संवेदनशील और प्राथमिकता वाले विभाग की जिम्मेदारी सौंपी है।सरकार के इस फैसले को “अनुभव और निरंतरता” की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। राजनीतिक परिवर्तन के बावजूद एक अनुभवी अफसर को महत्वपूर्ण विभाग की जिम्मेदारी देना इस बात का संकेत है कि सरकार प्रशासनिक दक्षता और बेहतर परिणामों को प्राथमिकता दे रही है, न कि केवल राजनीतिक समीकरणों को।विशेषज्ञों का मानना है कि डॉ. सिंह की नियुक्ति से स्कूल शिक्षा विभाग में नीतिगत स्थिरता बनी रहेगी और चल रही योजनाओं को गति मिलेगी। उनके अनुभव का लाभ प्रदेश के लाखों विद्यार्थियों को मिल सकता है, खासकर सरकारी स्कूलों में गुणवत्ता सुधार, डिजिटल शिक्षा के विस्तार और शिक्षकों के प्रशिक्षण जैसे क्षेत्रों में।सरकार के इस निर्णय से यह संदेश भी गया है कि “गुड गवर्नेंस” के लिए अनुभवी और सक्षम अधिकारियों पर भरोसा ही सबसे बड़ा आधार है। अब देखना होगा कि डॉ. कमलप्रीत सिंह अपनी नई जिम्मेदारी में शिक्षा व्यवस्था को किस नई दिशा में ले जाते हैं, लेकिन फिलहाल उनके चयन को प्रशासनिक मजबूती और स्थिरता की दिशा में एक ठोस कदम माना जा रहा है।