तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी
छत्तीसगढ़ के प्रशासनिक इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया है, जहां राज्य के सबसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण विभाग—गृह (होम), जेल विभाग की जिम्मेदारी पहली बार किसी महिला वरिष्ठ आईएएस अधिकारी को सौंपी गई है। यह पद राज्य की कानून-व्यवस्था, आंतरिक सुरक्षा, नक्सल उन्मूलन रणनीति और जेल प्रशासन जैसे अहम विषयों का शीर्ष नीति-निर्धारक माना जाता है।राज्य गठन वर्ष 2000 के बाद से अब तक इस विभाग की कमान प्रायः वरिष्ठ और अनुभवी पुरुष अधिकारियों के हाथों में रही है। प्रारंभिक दौर में एन.के. असवाल ने प्रमुख सचिव के रूप में गृह विभाग की नींव को सुदृढ़ किया। इसके बाद समय-समय पर मनोज कुमार पिंगुआ (अपर मुख्य सचिव), अरुण देव गौतम (आईपीएस, सचिव स्तर) और उमेश कुमार अग्रवाल (सचिव) जैसे अधिकारियों ने इस विभाग का नेतृत्व करते हुए राज्य की सुरक्षा व्यवस्था को दिशा दी।इसी क्रम में अब 1997 बैच की वरिष्ठ आईएएस अधिकारी निहारिका बारीक सिंह को गृह एवं जेल विभाग की शीर्ष जिम्मेदारी सौंपी गई है, जो अपने आप में ऐतिहासिक है। वे राज्य प्रशासन में अपनी सख्त कार्यशैली, पारदर्शिता और परिणामोन्मुख निर्णयों के लिए जानी जाती हैं। स्वास्थ्य, खाद्य, पंचायत, पर्यटन जैसे कई महत्वपूर्ण विभागों में सचिव एवं प्रमुख सचिव के रूप में कार्य कर चुकी निहारिका बारीक सिंह को जटिल प्रशासनिक परिस्थितियों से निपटने का व्यापक अनुभव है।छत्तीसगढ़ जैसे राज्य में गृह विभाग की भूमिका और भी चुनौतीपूर्ण हो जाती है, जहां नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा रणनीति, कानून-व्यवस्था बनाए रखना और जेल प्रशासन को प्रभावी ढंग से संचालित करना एक बड़ी जिम्मेदारी होती है। ऐसे में इस पद पर एक महिला अधिकारी की नियुक्ति प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बदलाव और विश्वास का प्रतीक मानी जा रही है।यह निर्णय केवल एक पदस्थापना नहीं, बल्कि महिला नेतृत्व को बढ़ावा देने की दिशा में एक मजबूत संदेश भी है। प्रशासनिक हलकों में इसे शासन की बदलती सोच और महिलाओं को शीर्ष निर्णयात्मक भूमिकाओं में अवसर देने की पहल के रूप में देखा जा रहा है।लोगों का कहना है कि छत्तीसगढ़ में गृह विभाग की कमान पहली बार महिला अधिकारी को सौंपा जाना न केवल एक ऐतिहासिक उपलब्धि है, बल्कि यह भविष्य में प्रशासनिक ढांचे में महिला सशक्तिकरण के नए आयाम भी स्थापित करेगा।