अनुभव और प्रशासनिक दक्षता का भरोसा—मनोज को फिर मिला वन विभाग का अहम जिम्मेदारी।

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तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी

राज्य शासन ने प्रशासनिक अनुभव और मजबूत कार्यशैली पर भरोसा जताते हुए 1994 बैच के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी मनोज कुमार पिंगुआ को एक बार फिर वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग का अपर मुख्य सचिव नियुक्त किया है। यह नियुक्ति न केवल उनकी प्रशासनिक दक्षता का प्रमाण है, बल्कि राज्य सरकार के पर्यावरणीय दृष्टिकोण और नीतिगत गंभीरता को भी दर्शाती है।मनोज कुमार पिंगुआ लंबे समय से शासन-प्रशासन के विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर अपनी प्रभावशाली भूमिका निभाते आए हैं। उनकी कार्यशैली में पारदर्शिता, निर्णय क्षमता और परिणाम आधारित कार्य संस्कृति स्पष्ट रूप से देखने को मिलती है। वन एवं जलवायु परिवर्तन जैसे संवेदनशील और भविष्य से जुड़े विभाग की जिम्मेदारी उन्हें सौंपना इस बात का संकेत है कि सरकार पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के मुद्दों को प्राथमिकता दे रही है।पिंगुआ की पूर्व कार्यकाल की उपलब्धियों को देखें तो उन्होंने विभागीय कार्यों में गति लाने, नीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन और जमीनी स्तर पर सकारात्मक बदलाव लाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उनके नेतृत्व में वन संरक्षण, जैव विविधता के संरक्षण और जलवायु परिवर्तन से जुड़े कार्यक्रमों को नई दिशा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान समय में जब जलवायु परिवर्तन वैश्विक चुनौती बन चुका है, ऐसे में अनुभवी और दूरदर्शी अधिकारी का इस विभाग की कमान संभालना राज्य के लिए फायदेमंद साबित होगा। पिंगुआ के पास प्रशासनिक समझ के साथ-साथ नीतिगत गहराई भी है, जिससे वे जटिल चुनौतियों का समाधान निकालने में सक्षम हैं।राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में इस नियुक्ति को सकारात्मक कदम के रूप में देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि उनके नेतृत्व में विभाग नई ऊर्जा के साथ कार्य करेगा और राज्य को पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।


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