तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी
छत्तीसगढ़ की राजनीति में आमतौर पर चर्चा मुख्यमंत्री, मंत्रियों और बड़े राजनीतिक चेहरों के इर्द-गिर्द घूमती है। लेकिन पिछले कुछ समय में एक ऐसा नाम सत्ता के भीतर लगातार प्रभावशाली माना जा रहा है, जो न तो मंचों पर भाषण देता है, न राजनीतिक बयान जारी करता है और न ही सार्वजनिक रूप से शक्ति प्रदर्शन करता है।यह नाम है — सुबोध कुमार सिंह।राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था को करीब से देखने वाले लोगों का मानना है कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय सरकार में मुख्यमंत्री के बाद यदि किसी एक पद की वास्तविक उपयोगिता और प्रभाव सबसे अधिक बढ़ा है, तो वह मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव का पद है।और इस पद पर बैठे सुबोध कुमार सिंह केवल एक अधिकारी की भूमिका तक सीमित नहीं दिखाई देते, बल्कि वे मुख्यमंत्री कार्यालय की रणनीतिक व्यवस्था, निर्णय प्रक्रिया और प्रशासनिक समन्वय के सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ के रूप में उभरते दिख रहे हैं।दरअसल लोकतांत्रिक सरकारों में जनता केवल मुख्यमंत्री और मंत्रियों को देखती है, लेकिन सरकार के भीतर निर्णय किस गति से आगे बढ़ेंगे, कौन-सी फाइल प्राथमिकता में होगी, मुख्यमंत्री किन मुद्दों पर तत्काल प्रतिक्रिया देंगे, किस विभाग पर विशेष ध्यान रहेगा, किन अधिकारियों की पहुंच मुख्यमंत्री तक आसान होगी और किन विषयों को फिलहाल रोका जाएगा — यह सब बड़े स्तर पर मुख्यमंत्री कार्यालय की कार्यशैली पर निर्भर करता है।यहीं से प्रमुख सचिव की भूमिका अत्यंत प्रभावशाली हो जाती है।राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि किसी भी मुख्यमंत्री की कार्यक्षमता उसके “कोर एडमिनिस्ट्रेटिव सिस्टम” से तय होती है।यदि मुख्यमंत्री सरकार का सार्वजनिक चेहरा होते हैं, तो प्रमुख सचिव उस चेहरे के पीछे काम करने वाला प्रशासनिक “कंट्रोल टॉवर” माना जाता है।छत्तीसगढ़ में वर्तमान समय में यही स्थिति स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है।विभागीय सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री कार्यालय में आने वाली महत्वपूर्ण फाइलों की प्राथमिकता तय करने, विभागों के बीच समन्वय बनाने, प्रशासनिक संवेदनशील मामलों को फिल्टर करने और मुख्यमंत्री के समय प्रबंधन को व्यवस्थित करने में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह की भूमिका बेहद निर्णायक मानी जा रही है।यही कारण है कि मंत्रालय के भीतर उनका प्रभाव लगातार चर्चा का विषय बनता जा रहा है।विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि किसी भी सरकार में मुख्यमंत्री कार्यालय की ताकत ही उस सरकार की स्थिरता और गति तय करती है।यदि मुख्यमंत्री कार्यालय मजबूत हो, तो सरकार के निर्णयों में स्पष्टता और नियंत्रण दिखाई देता है।और यदि मुख्यमंत्री कार्यालय कमजोर हो जाए, तो प्रशासनिक भ्रम, विभागीय टकराव और निर्णयों में देरी जैसी स्थितियां बनने लगती हैं।इसी संदर्भ में देखा जाए तो मुख्यमंत्री विष्णु देव साय सरकार में प्रमुख सचिव की भूमिका पहले की तुलना में कहीं अधिक सक्रिय और प्रभावशाली दिखाई दे रही है।सुबोध कुमार सिंह को लेकर यह धारणा भी मजबूत हो रही है कि वे केवल फाइल आधारित अधिकारी नहीं हैं, बल्कि शासन के राजनीतिक और प्रशासनिक संतुलन को समझने वाले अफसर हैं।देश की राजनीति में प्रधानमंत्री कार्यालय यानी पीएमओ की कार्यप्रणाली को हमेशा सबसे शक्तिशाली प्रशासनिक संरचना माना जाता है। वहां प्रधानमंत्री के प्रमुख सचिव और सलाहकार सार्वजनिक राजनीति से दूर रहकर सरकार की दिशा तय करने में बड़ी भूमिका निभाते हैं।वे राजनीतिक व्यक्ति नहीं होते, लेकिन शासन व्यवस्था की धुरी माने जाते हैं।ठीक उसी प्रकार अब छत्तीसगढ़ में भी मुख्यमंत्री कार्यालय की कार्यशैली को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है।सरकारी हलकों में यह माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री कार्यालय अब केवल औपचारिक दफ्तर नहीं रह गया, बल्कि यह नीति, प्राथमिकता और प्रशासनिक नियंत्रण का केंद्रीय केंद्र बन चुका है।और इस पूरी व्यवस्था के संचालन में सुबोध कुमार सिंह की भूमिका सबसे प्रमुख रूप से देखी जा रही है।दिलचस्प बात यह भी है कि सत्ता के वास्तविक प्रभावशाली लोग अक्सर सार्वजनिक रूप से कम दिखाई देते हैं।वे राजनीतिक मंचों से दूर रहते हैं, लेकिन निर्णय प्रक्रिया में उनकी उपस्थिति सबसे अधिक महसूस की जाती है।सुबोध कुमार सिंह का नाम भी अब इसी श्रेणी में लिया जाने लगा है।प्रशासनिक अधिकारियों के बीच यह धारणा मजबूत है कि मुख्यमंत्री कार्यालय में यदि किसी अधिकारी की टिप्पणी या प्राथमिकता तय हो जाए, तो पूरा विभाग उसी दिशा में तेजी से काम करने लगता है।यानी मुख्यमंत्री कार्यालय की “संकेत प्रणाली” ही पूरे शासन तंत्र की गति तय करती है।और इस संकेत प्रणाली के सबसे महत्वपूर्ण संचालक वर्तमान समय में प्रमुख सचिव माने जा रहे हैं।राजनीतिक दृष्टि से भी यह स्थिति महत्वपूर्ण मानी जा रही है।क्योंकि किसी भी सरकार में मुख्यमंत्री के सबसे विश्वसनीय अधिकारी की भूमिका केवल प्रशासनिक नहीं रहती, बल्कि वह सरकार की स्थिरता, छवि और निर्णय क्षमता से भी जुड़ जाती है।इसीलिए छत्तीसगढ़ के सत्ता गलियारों में अब यह चर्चा तेजी से उठ रही है कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय सरकार की प्रशासनिक रीढ़ आखिर कौन है?और इस सवाल के जवाब में बार-बार एक ही नाम सामने आता है – सुबोध कुमार सिंह..!