ज्ञानभारतम अभियान में जीपीएम जिले से मिली दुर्लभ रामचरितमानस पांडुलिपि अवधी भाषा में रचित प्राचीन ग्रंथ का हुआ डिजिटल संरक्षण…पीढ़ियों से सुरक्षित विरासत को कलेक्टर देवांगन ने बताया अमूल्य धरोहर।

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नूर मोहम्मद गौरेला-पेंड्रा-मरवाही(सर्वव्यापी)

भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय द्वारा संचालित “ज्ञानभारतम” राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान के तहत जीपीएम जिले में इतिहास, संस्कृति और धार्मिक विरासत से जुड़ी एक अत्यंत दुर्लभ धरोहर सामने आई है। अभियान के दौरान जिले में अवधी भाषा में रचित रामचरितमानस की प्राचीन पांडुलिपि सुरक्षित रूप में प्राप्त हुई है, जिसे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जानकारी के अनुसार यह दुर्लभ पांडुलिपि गौरेला विकासखंड के ग्राम पंचायत धनौली में ज्ञानेंद्र उपाध्याय के परिवार के पास पीढ़ियों से सुरक्षित संरक्षित रही है। बताया गया कि उनके परदादा द्वारा वर्षों पूर्व इस अमूल्य धरोहर को सुरक्षित रखा गया था और परिवार ने इसे आज तक सहेजकर रखा है। कलेक्टर डॉ. संतोष कुमार देवांगन की उपस्थिति में इस दुर्लभ पांडुलिपि का डिजिटल संरक्षण किया गया। कलेक्टर ने इसे जिले की ऐतिहासिक, धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत की अमूल्य धरोहर बताते हुए कहा कि इस प्रकार की पांडुलिपियां केवल ग्रंथ नहीं, बल्कि हमारी सभ्यता, संस्कृति और परंपरा का जीवंत इतिहास हैं। उन्होंने कहा कि “ज्ञानभारतम” अभियान का उद्देश्य देशभर में बिखरी प्राचीन पांडुलिपियों की पहचान कर उनका दस्तावेजीकरण एवं डिजिटल संरक्षण करना है, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी भारत की समृद्ध ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक विरासत से परिचित हो सकें। विशेषज्ञों के अनुसार अवधी भाषा में रचित यह प्राचीन रामचरितमानस पांडुलिपि साहित्य, धर्म और लोक संस्कृति के अध्ययन की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। जिले में इस प्रकार की दुर्लभ धरोहर का मिलना क्षेत्र के लिए गौरव की बात है।


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