तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी
बढ़ते पर्यावरणीय संकट, लगातार बढ़ते तापमान, जल स्रोतों के सूखने और अंधाधुंध वृक्ष कटाई को लेकर बिलासपुर जिले के बिल्हा विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत बरतोरी निवासी वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता लक्ष्मीकांत कौशिक ने गहरी चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते पर्यावरण संरक्षण के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाली पीढ़ियों को गंभीर जल, जंगल और जमीन के संकट का सामना करना पड़ सकता है।लक्ष्मीकांत कौशिक ने कहा कि वर्तमान समय में जिस प्रकार प्राकृतिक संसाधनों का दोहन बढ़ रहा है, वह समाज और मानव जीवन दोनों के लिए चिंता का विषय है। एक ओर जंगलों की कटाई जारी है, वहीं दूसरी ओर जल संरक्षण और वृक्षारोपण के प्रयास अपेक्षित स्तर पर दिखाई नहीं दे रहे हैं। इसका प्रत्यक्ष प्रभाव जलवायु परिवर्तन, भीषण गर्मी और अनियमित वर्षा के रूप में सामने आ रहा है।उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि समाज के प्रत्येक नागरिक का भी नैतिक दायित्व है। यदि हर व्यक्ति अपने जीवन में एक पौधा लगाकर उसके संरक्षण का संकल्प ले और जल स्रोतों को बचाने की दिशा में कार्य करे, तो पर्यावरण संतुलन को काफी हद तक सुरक्षित रखा जा सकता है।सामाजिक कार्यकर्ता लक्ष्मीकांत कौशिक ने ग्रामीण क्षेत्रों में पर्यावरण जागरूकता अभियान चलाने, अधिक से अधिक वृक्षारोपण करने तथा जल संरक्षण के पारंपरिक उपायों को पुनर्जीवित करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने युवाओं से भी पर्यावरण संरक्षण की मुहिम में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया।उन्होंने कहा कि आज जिस प्रकार प्रदेश सहित पूरे देश में भीषण गर्मी का प्रकोप बढ़ रहा है, वह प्रकृति के साथ लगातार हो रहे छेड़छाड़ का परिणाम है। यदि अब भी समाज और शासन-प्रशासन ने गंभीरता नहीं दिखाई, तो भविष्य में स्थिति और भयावह हो सकती है।लक्ष्मीकांत कौशिक का मानना है कि पर्यावरण संरक्षण केवल एक अभियान नहीं, बल्कि मानव अस्तित्व को सुरक्षित रखने का संकल्प है। इसके लिए जनभागीदारी, जागरूकता और सतत प्रयास ही सबसे बड़ा समाधान है।