तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी
छत्तीसगढ़ की हाईप्रोफाइल विधानसभा सीटों में शामिल बिल्हा विधानसभा क्षेत्र में वर्ष 2028 के चुनाव को लेकर अभी से राजनीतिक समीकरण बनने लगे हैं। वर्तमान विधायक एवं भाजपा के वरिष्ठ नेता धरमलाल कौशिक का क्षेत्र में मजबूत जनाधार है और वे लगातार इस सीट का प्रतिनिधित्व करते रहे हैं। पिछले चुनावों में भी भाजपा ने यहां उल्लेखनीय प्रदर्शन किया था। हालांकि आगामी चुनाव में भाजपा के भीतर टिकट को लेकर प्रतिस्पर्धा और भी दिलचस्प होती दिखाई दे रही है। राजनीतिक गलियारों में सबसे चर्चित नामों में भाजपा महिला मोर्चा की सक्रिय नेत्री एवं समाजसेवी अंबालिका साहू का नाम प्रमुखता से लिया जा रहा है। क्षेत्र में उनकी बढ़ती सक्रियता, सामाजिक कार्यक्रमों में भागीदारी तथा महिला एवं युवा वर्ग के बीच बढ़ते प्रभाव को देखते हुए उन्हें भाजपा की संभावित दावेदारों में माना जा रहा है।इसी तरह राज्य स्तर पर महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाल रहे क्रेडा अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह सवन्नी भी बिल्हा विधानसभा क्षेत्र में लगातार सक्रिय नजर आ रहे हैं। संगठन और प्रशासनिक अनुभव के कारण उनका नाम भी संभावित दावेदारों की सूची में चर्चा का विषय बना हुआ है। भाजपा के भीतर उन्हें एक प्रभावशाली और संसाधन-संपन्न चेहरे के रूप में देखा जाता है।वहीं वर्तमान विधायक धरमलाल कौशिक के पुत्र देवेंद्र कौशिक भी राजनीतिक गतिविधियों में लगातार सक्रिय हैं। युवा नेतृत्व के रूप में उनकी पहचान बन रही है और भाजपा कार्यकर्ताओं के एक वर्ग में यह चर्चा है कि पार्टी भविष्य की राजनीति को ध्यान में रखते हुए नए चेहरे पर भी दांव लगा सकती है। हालांकि इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक संकेत नहीं हैं।भाजपा के भीतर अन्य नामों की बात करें तो जिला पंचायत सदस्य गोविंद यादव, जनपद पंचायत बिल्हा अध्यक्ष रामकुमार कौशिक तथा पूर्व जिला पंचायत सदस्य अशोक कौशिक भी अपने-अपने सामाजिक और राजनीतिक आधार के बल पर मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं। इन नेताओं की ग्रामीण क्षेत्रों में अच्छी पकड़ है और वे लंबे समय से संगठन तथा जनसरोकार के मुद्दों पर सक्रिय रहे हैं।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बिल्हा विधानसभा में भाजपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती विपक्ष नहीं बल्कि टिकट वितरण के दौरान आंतरिक संतुलन बनाए रखने की होगी। क्षेत्र में कौशिक, साहू, यादव और अन्य प्रभावशाली सामाजिक वर्गों का महत्वपूर्ण प्रभाव है। ऐसे में पार्टी को ऐसा प्रत्याशी चुनना होगा जो सभी वर्गों को साथ लेकर चल सके और चुनावी जीत सुनिश्चित कर सके।फिलहाल चुनाव में अभी लगभग दो वर्ष का समय शेष है, लेकिन बिल्हा की राजनीति में हलचल तेज हो चुकी है। नेताओं की बढ़ती सक्रियता, जनसंपर्क अभियान और सामाजिक कार्यक्रमों में उपस्थिति इस बात का संकेत है कि 2028 का चुनाव केवल विपक्ष और सत्ता के बीच नहीं, बल्कि भाजपा के भीतर भी कई दावेदारों के राजनीतिक भविष्य का निर्णायक मुकाबला साबित हो सकता है।राजनीतिक संदेश स्पष्ट है—बिल्हा में भाजपा का टिकट ही आधी जीत माना जाता है, और इसी टिकट की दौड़ में कई दिग्गज अभी से अपनी-अपनी ताकत दिखाने में जुट गए हैं।