तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी

बिलासपुर वन वृत्त में वर्ष 2022 के वृक्षारोपण कार्य हेतु गोबर खाद खरीदी में सामने आई कथित वित्तीय अनियमितताओं के मामले में बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की गई है। मुख्य वन संरक्षक, बिलासपुर वृत्त द्वारा जारी आदेश के अनुसार कैंपा (CAMPA) शाखा प्रभारी एवं सहायक ग्रेड-02 भूपेंद्र कुमार साहू को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।जारी आदेश में कहा गया है कि प्रधान मुख्य वन संरक्षक (सतर्कता/शिकायत) द्वारा कराई गई जांच में गोबर खाद खरीदी के दौरान लगभग 14 लाख 77 हजार 600 रुपये के अवैध लेखा समायोजन, कूटरचित दस्तावेजों के उपयोग तथा शासकीय धन के गबन से संबंधित शिकायतें प्रथम दृष्टया सत्य पाई गई हैं।जांच प्रतिवेदन के अनुसार, उस अवधि में कैंपा शाखा प्रभारी के रूप में कार्यरत भूपेंद्र कुमार साहू ने अपने पदीय दायित्वों का समुचित निर्वहन नहीं किया। आरोप है कि उन्होंने संबंधित दस्तावेजों में दर्शाए गए अधिकारियों की पदस्थापना अवधि, हस्ताक्षर नमूनों तथा जावक क्रमांकों का मूल अभिलेखों से सत्यापन नहीं कराया। इसके अलावा वनमंडलाधिकारी को अंधेरे में रखकर कथित रूप से फर्जी प्रमाण-पत्रों के आधार पर एलओसी (LOC) तैयार कराई गई।आदेश में यह भी उल्लेख किया गया है कि जांच के दौरान प्रारंभिक बयानों में प्रमाण-पत्रों के पुराने बस्तों में होने की जानकारी दी गई, जबकि बाद में प्रतिपरीक्षण के दौरान उपवनमंडल कार्यालय पेंड्रा से प्रमाण-पत्र प्राप्त होने का संशोधित बयान प्रस्तुत किया गया। इसे शासकीय कर्तव्य के प्रति लापरवाही, कर्तव्यनिष्ठा में कमी तथा कथित षड्यंत्र में सहभागिता का संकेत माना गया है।मुख्य वन संरक्षक ने अपने आदेश में कहा है कि भूपेंद्र कुमार साहू का आचरण छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के प्रावधानों के विपरीत प्रतीत होता है और यह गंभीर अनुशासनहीनता तथा वित्तीय कदाचार की श्रेणी में आता है।इसी आधार पर छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए उन्हें तत्काल प्रभाव से शासकीय सेवा से निलंबित कर दिया गया है।निलंबन अवधि में भूपेंद्र कुमार साहू का मुख्यालय मुख्य वन संरक्षक कार्यालय, बिलासपुर वृत्त, बिलासपुर निर्धारित किया गया है। साथ ही उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ते की पात्रता होगी तथा सक्षम अनुमति के बिना मुख्यालय छोड़ने की अनुमति नहीं होगी।वन विभाग की इस कार्रवाई को गोबर खाद खरीदी एवं वृक्षारोपण कार्यों में कथित वित्तीय अनियमितताओं के खिलाफ सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है। मामले में आगे विभागीय जांच और अन्य जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की भी पड़ताल होने की संभावना जताई जा रही है।