तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी
छत्तीसगढ़ के प्रशासनिक तंत्र में कुछ अधिकारी ऐसे होते हैं, जिनकी पहचान केवल उनके पद से नहीं बल्कि उनके काम से बनती है। वरिष्ठ आईएएस अधिकारी सोनमणि बोरा उन्हीं चुनिंदा अधिकारियों में शामिल हैं, जिन्होंने अपने लंबे प्रशासनिक अनुभव, कार्यकुशलता और विकासोन्मुख सोच के दम पर एक अलग पहचान स्थापित की है। वर्तमान में आदिम जाति, अनुसूचित जाति, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक विकास विभाग के प्रमुख सचिव के रूप में कार्यरत सोनमणि बोरा को प्रदेश में जनजातीय विकास से जुड़े सबसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी सौंपी गई है और वे इस जिम्मेदारी का निर्वहन पूरी प्रतिबद्धता के साथ कर रहे हैं।छत्तीसगढ़ देश के उन राज्यों में शामिल है, जहां बड़ी संख्या में आदिवासी समुदाय निवास करते हैं। राज्य के अनेक जिले और दूरस्थ वनांचल क्षेत्र आज भी शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और आधारभूत सुविधाओं की चुनौतियों से जूझ रहे हैं। ऐसे समय में जनजातीय विकास विभाग की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है। विभाग की योजनाएं केवल सरकारी दस्तावेजों तक सीमित न रहें, बल्कि उनका लाभ वास्तव में अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे, यह सुनिश्चित करना किसी भी अधिकारी के लिए बड़ी चुनौती होती है। प्रशासनिक जानकारों का मानना है कि सोनमणि बोरा ने इस चुनौती को अवसर में बदलने का प्रयास किया है।सोनमणि बोरा की कार्यशैली की सबसे बड़ी विशेषता यह मानी जाती है कि वे योजनाओं के क्रियान्वयन पर विशेष ध्यान देते हैं। उनके नेतृत्व में विभागीय अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए जाते हैं कि योजनाओं की सफलता का मूल्यांकन केवल खर्च की गई राशि से नहीं, बल्कि लाभार्थियों पर पड़े वास्तविक प्रभाव से किया जाए। यही कारण है कि विभाग के अंतर्गत संचालित छात्रावासों, आश्रमों, शिक्षा सहायता योजनाओं और कौशल विकास कार्यक्रमों की लगातार समीक्षा की जा रही है।विशेषज्ञों का मानना है कि आदिवासी समाज का विकास केवल आर्थिक सहायता से संभव नहीं है, बल्कि इसके लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और आत्मनिर्भरता की दिशा में ठोस प्रयास आवश्यक हैं। इसी सोच के अनुरूप विभाग द्वारा संचालित शैक्षणिक संस्थानों की गुणवत्ता सुधारने, विद्यार्थियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने तथा प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए उन्हें तैयार करने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इन पहलों के पीछे सोनमणि बोरा की सक्रिय भूमिका को महत्वपूर्ण माना जाता है।प्रशासनिक हलकों में उनकी पहचान एक ऐसे अधिकारी के रूप में है जो फाइलों से अधिक जमीनी हकीकत को महत्व देते हैं। यही वजह है कि विभागीय बैठकों में वे अक्सर क्षेत्रीय अधिकारियों से सीधे संवाद कर वास्तविक स्थिति की जानकारी लेते हैं। कई बार योजनाओं के क्रियान्वयन में आने वाली बाधाओं को दूर करने के लिए त्वरित निर्णय लेने की उनकी शैली ने विभागीय कार्यों में गति लाई है। अधिकारियों और कर्मचारियों का कहना है कि वे अनुशासन और संवेदनशीलता के बीच संतुलन बनाकर काम करते हैं, जिससे कार्य संस्कृति में सकारात्मक बदलाव देखने को मिलता है।जनजातीय क्षेत्रों में शिक्षा और सामाजिक विकास को लेकर उनकी सोच दूरगामी मानी जाती है। उनका मानना है कि यदि आदिवासी युवाओं को बेहतर शिक्षा, प्रशिक्षण और अवसर उपलब्ध कराए जाएं तो वे न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे समाज के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। इसी दृष्टिकोण के साथ विभाग द्वारा विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों को प्रभावी ढंग से लागू करने पर जोर दिया जा रहा है।सोनमणि बोरा की सबसे बड़ी ताकत उनकी सादगी और कार्य के प्रति समर्पण को माना जाता है। प्रशासनिक सेवा में अक्सर यह देखा जाता है कि बड़े पदों पर पहुंचने के बाद अधिकारी जनता से दूर हो जाते हैं, लेकिन बोरा की छवि एक ऐसे अधिकारी की है जो समस्याओं को समझने और समाधान खोजने में विश्वास रखते हैं। यही कारण है कि विभागीय अमले के साथ-साथ विभिन्न सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों के बीच भी उनकी कार्यशैली को सकारात्मक दृष्टि से देखा जाता है।प्रदेश के विकास में जनजातीय समाज की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। ऐसे में इस वर्ग के उत्थान के लिए बनाई गई योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन राज्य के समग्र विकास का आधार बन सकता है। सोनमणि बोरा इसी सोच के साथ विभागीय कार्यों को आगे बढ़ा रहे हैं। उनका प्रयास है कि शासन की योजनाओं का लाभ वास्तव में उन लोगों तक पहुंचे जिनके लिए वे बनाई गई हैं। यही कारण है कि आज उनका नाम एक ऐसे प्रशासनिक अधिकारी के रूप में लिया जाता है, जो पद की प्रतिष्ठा से अधिक अपने काम की पहचान पर विश्वास रखते हैं।कहना गलत नहीं होगा कि सोनमणि बोरा उन अधिकारियों में शामिल हैं, जिनके लिए प्रशासन केवल शासन चलाने का माध्यम नहीं, बल्कि समाज के वंचित और जरूरतमंद वर्गों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का अवसर है। जनजातीय विकास विभाग में उनकी सक्रियता, दूरदृष्टि और परिणामोन्मुख कार्यशैली उन्हें प्रदेश के प्रभावशाली और जनहितैषी अधिकारियों की श्रेणी में स्थापित करती है।