तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी

बिलासपुर जिले में भूमि विक्रय के लिए हुए इकरारनामा के बावजूद निर्धारित समय सीमा में रजिस्ट्री नहीं होने से परेशान एक ग्रामीण ने जिला प्रशासन और पुलिस विभाग से हस्तक्षेप की मांग की है। बिलासपुर जिले के ग्राम हरदीकला टोना, तहसील बोदरी निवासी रामायण कौशिक ने कलेक्टर एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक बिलासपुर को आवेदन सौंपकर मामले की निष्पक्ष जांच एवं शीघ्र रजिस्ट्री कराने की मांग की है।आवेदन के अनुसार, आवेदक की खसरा नंबर 1059/2, 1059/8 एवं 1059/10 की भूमि का 23 जुलाई 2024 को इकरारनामा किया गया था। इसमें भूमि का विक्रय लगभग 44 लाख 50 हजार रुपये प्रति एकड़ की दर से किया गया था। इकरारनामे में स्पष्ट उल्लेख किया गया था कि राजस्व दस्तावेज तैयार कर सीमांकन उपरांत निर्धारित समयावधि में भूमि की रजिस्ट्री कराई जाएगी। साथ ही विक्रय राशि का एक बड़ा हिस्सा क्रेताओं द्वारा भुगतान किए जाने की बात भी दर्ज है।आवेदक का आरोप है कि इकरारनामे में 30 नवंबर 2024 तक रजिस्ट्री कराने का उल्लेख होने के बावजूद आज तक भूमि की विधिवत रजिस्ट्री नहीं कराई गई है। इस कारण न केवल भूमि स्वामी को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है, बल्कि लगातार मानसिक तनाव और अनिश्चितता की स्थिति भी बनी हुई है।रामायण कौशिक ने अपने आवेदन में कहा है कि लंबे समय से रजिस्ट्री लंबित रहने के कारण भविष्य में कानूनी विवाद की आशंका बढ़ती जा रही है। उन्होंने प्रशासन से आग्रह किया है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित राजस्व अधिकारियों एवं पक्षकारों को आवश्यक निर्देश दिए जाएं, ताकि भूमि की रजिस्ट्री प्रक्रिया शीघ्र पूर्ण हो सके और किसी प्रकार का विवाद उत्पन्न न हो।आवेदन में यह भी उल्लेख किया गया है कि यदि निर्धारित अवधि के भीतर रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूरी नहीं होती है तो वे अपनी भूमि के संबंध में अन्य वैधानिक विकल्पों पर विचार करने के लिए बाध्य होंगे। इस संबंध में उन्होंने प्रशासन से समयबद्ध कार्रवाई की मांग की है।स्थानीय स्तर पर यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। अब निगाहें जिला प्रशासन और राजस्व विभाग की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं कि इकरारनामे के आधार पर लंबित रजिस्ट्री के इस मामले में संबंधित पक्षों को क्या निर्देश दिए जाते हैं और पीड़ित को कब तक राहत मिलती है।