तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी
छत्तीसगढ़ कांग्रेस में संगठनात्मक बदलाव को लेकर चर्चाओं का दौर तेज है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री टी एस सिंहदेव को लेकर राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा जोर पकड़ रही है कि यदि कांग्रेस आगामी चुनावों में मजबूती से वापसी करना चाहती है, तो उन्हें प्रदेश संगठन की कमान सौंपने पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।कांग्रेस के वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज के कार्यकाल को लेकर भी चर्चाएं चल रही हैं। पार्टी कार्यकर्ताओं का एक वर्ग मानता है कि संगठन को नए नेतृत्व और नई रणनीति की आवश्यकता है। ऐसे में टी.एस. सिंहदेव एक ऐसे नेता के रूप में सामने आते हैं जिनकी छवि सौम्य, अनुभवी और सर्वमान्य रही है।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सिंहदेव ने लंबे समय तक कांग्रेस संगठन और सरकार दोनों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। सरगुजा से लेकर पूरे प्रदेश में उनकी स्वीकार्यता है तथा वे विभिन्न गुटों के बीच समन्वय स्थापित करने की क्षमता रखते हैं। यही कारण है कि उन्हें प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने की मांग समय-समय पर उठती रही है।हालांकि यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि टी.एस. सिंहदेव के कांग्रेस छोड़कर किसी अन्य दल में जाने की कोई आधिकारिक जानकारी या संकेत सामने नहीं आए हैं। वे लगातार कांग्रेस की विचारधारा और संगठन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त करते रहे हैं। ऐसे में उनके पार्टी छोड़ने की अटकलों को राजनीतिक चर्चाओं तक ही सीमित माना जा रहा है।कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करना और कार्यकर्ताओं में नया उत्साह पैदा करना है। यदि पार्टी नेतृत्व आगामी दिनों में संगठनात्मक बदलाव करता है, तो टी.एस. सिंहदेव जैसे अनुभवी नेता को प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपना कांग्रेस के लिए एक महत्वपूर्ण राजनीतिक फैसला साबित हो सकता है।अब नजर कांग्रेस आलाकमान के निर्णय पर टिकी है कि वह छत्तीसगढ़ में संगठन को नई दिशा देने के लिए किस नेतृत्व पर भरोसा जताता है। कई कार्यकर्ताओं का मानना है कि यदि पार्टी को प्रदेश में दोबारा सत्ता की दौड़ में मजबूती से खड़ा होना है, तो अनुभवी और सर्वस्वीकार्य नेतृत्व को आगे लाना समय की मांग है।