तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी
प्रदेश सहित देशभर के स्टेनो कैडर में उस समय भारी आक्रोश फैल गया, जब सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में स्वयं को “डॉ. पुरूषोत्तम मेघवाल” बताने वाले व्यक्ति ने सरकारी स्टेनोग्राफर कर्मचारियों को लेकर बेहद आपत्तिजनक और अमर्यादित टिप्पणियां कर दीं। वीडियो में कथित रूप से स्टेनो कर्मचारियों को “कलेक्टर, एसडीएम और सचिवों का वसूली करने वाला दलाल” बताया गया है, जिससे पूरे स्टेनो समुदाय की छवि धूमिल करने का आरोप लगाया जा रहा है।जानकारी के अनुसार, वीडियो में दिखाई दे रहा व्यक्ति “मेघवाल्स IAS” नाम से संचालित किसी कोचिंग संस्थान से जुड़ा बताया जा रहा है। हालांकि यह कोचिंग सेंटर कहां संचालित होता है और इसकी अधिकृत मान्यता क्या है, इसको लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के बाद विभिन्न विभागों में कार्यरत स्टेनो कर्मचारियों ने इसे पूरे कैडर का सार्वजनिक अपमान बताते हुए कड़ी नाराजगी जताई है।स्टेनो कर्मचारियों का कहना है कि किसी भी प्रशासनिक व्यवस्था में स्टेनोग्राफर की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण और जिम्मेदार होती है। शासन-प्रशासन की गोपनीय फाइलों, आदेशों और संवेदनशील दस्तावेजों को व्यवस्थित करने का कार्य स्टेनो कैडर करता है। ऐसे में बिना किसी प्रमाण के पूरे वर्ग को “दलाल” और “वसूली करने वाला” कहना न केवल मानसिक प्रताड़ना है, बल्कि यह सरकारी कर्मचारियों की गरिमा पर सीधा हमला भी है।कर्मचारियों का आरोप है कि कुछ तथाकथित मोटिवेशनल और कोचिंग संस्थान संचालक सोशल मीडिया पर लोकप्रियता पाने के लिए सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ भड़काऊ और अपमानजनक भाषा का प्रयोग कर रहे हैं। इससे समाज में भ्रम की स्थिति बन रही है और सरकारी सेवाओं के प्रति नकारात्मक वातावरण तैयार किया जा रहा है। कर्मचारियों ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ शिकायत है तो उसका तथ्यात्मक आधार प्रस्तुत किया जाना चाहिए, लेकिन पूरे कैडर को भ्रष्ट और दलाल कहना दुर्भावनापूर्ण मानसिकता को दर्शाता है।स्टेनो संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि संबंधित व्यक्ति सार्वजनिक रूप से माफी नहीं मांगता और वीडियो वापस नहीं लेता, तो उसके एवं उसके कथित कोचिंग संस्थान के खिलाफ मानहानि, आईटी एक्ट तथा शासकीय कर्मचारियों की छवि धूमिल करने संबंधी धाराओं के तहत FIR दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इस संबंध में विभिन्न कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों द्वारा सामूहिक बैठक कर आगे की रणनीति तैयार किए जाने की भी जानकारी सामने आई है।कर्मचारियों ने शासन और प्रशासन से मांग की है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सरकारी कर्मचारियों की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाले ऐसे बयानों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। उनका कहना है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर किसी भी वर्ग विशेष को अपमानित करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।वायरल वीडियो ने अब एक बड़े विवाद का रूप ले लिया है और आने वाले दिनों में यह मामला कानूनी कार्रवाई तक पहुंच सकता है। स्टेनो कैडर के कर्मचारियों का स्पष्ट कहना है कि सम्मान और मर्यादा से समझौता नहीं किया जाएगा तथा पूरे समुदाय को बदनाम करने वालों के खिलाफ कठोर कदम उठाए जाएंगे।