एक साल से जांच ठंडे बस्ते में, जेडी शिक्षा पर संरक्षण देने के आरोप…पूर्व डीईओ अनिल तिवारी के मामले में फिर भड़का कर्मचारी आक्रोश, 31 मई तक कार्रवाई नहीं तो 16 जून से आंदोलन।

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तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी

बिलासपुर शिक्षा विभाग में लंबे समय से विवादों और शिकायतों में घिरे पूर्व जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) अनिल तिवारी के मामले में अब सीधे संयुक्त संचालक (जेडी) शिक्षा विभाग बिलासपुर की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े होने लगे हैं। कर्मचारी संघ के पूर्व जिलाध्यक्ष एवं किसान मजदूर महासंघ छत्तीसगढ़ सर्व समाज के अध्यक्ष श्याम मूरत कौशिक ने आरोप लगाया है कि जेडी शिक्षा विभाग पिछले एक वर्ष से मामले की जांच को जानबूझकर दबाए बैठे हैं और अपने ही कार्यालय में पदस्थ रहे पूर्व डीईओ अनिल तिवारी को संरक्षण देने का काम कर रहे हैं।श्याम मूरत कौशिक ने जेडी शिक्षा विभाग को ज्ञापन सौंपते हुए स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि 31 मई तक मामले में ठोस कार्रवाई प्रारंभ नहीं की गई, तो 16 जून को जेडी शिक्षा विभाग बिलासपुर कार्यालय के सामने धरना प्रदर्शन किया जाएगा। ज्ञापन की प्रतियां मुख्यमंत्री, स्कूल शिक्षा मंत्री, शिक्षा सचिव, शिक्षा संचालक, बिलासपुर संभागायुक्त एवं बिलासपुर कलेक्टर को भी भेजी गई हैं।कर्मचारी नेताओं का आरोप है कि पूर्व डीईओ अनिल तिवारी के कार्यकाल के दौरान कर्मचारियों से जुड़े कई विवादित निर्णय लिए गए, शिकायतें हुईं, लेकिन आज तक किसी भी मामले में पारदर्शी जांच नहीं कराई गई। सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर एक वर्ष बीत जाने के बाद भी जांच आगे क्यों नहीं बढ़ी? यदि शिकायतें निराधार थीं तो विभाग ने उन्हें खारिज क्यों नहीं किया, और यदि शिकायतों में तथ्य थे तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई?श्याम मूरत कौशिक ने आरोप लगाया कि लगभग एक वर्ष पहले भी इन्हीं मुद्दों को लेकर जेडी कार्यालय के सामने आंदोलन किया गया था। उस समय जेडी शिक्षा विभाग द्वारा जांच और कार्रवाई का आश्वासन देकर आंदोलन समाप्त कराया गया, लेकिन उसके बाद पूरा मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। अब कर्मचारियों में यह धारणा बनती जा रही है कि विभागीय अधिकारियों के बीच आपसी संबंधों और संरक्षण की राजनीति के कारण कार्रवाई नहीं हो रही।उन्होंने कहा कि जेडी शिक्षा विभाग के अधिकारी 30 जून 2026 को सेवानिवृत्त होने वाले हैं, लेकिन अपने कार्यकाल के अंतिम दौर में भी विभागीय शिकायतों और विवादों के निराकरण को लेकर गंभीरता नहीं दिखाई जा रही। उल्टा, कर्मचारियों का आरोप है कि शिकायतों को दबाने और समय निकालने की कोशिश की जा रही है ताकि मामला स्वतः शांत हो जाए।कर्मचारी संगठनों का कहना है कि शिक्षा विभाग में जवाबदेही लगातार कमजोर होती जा रही है। शिकायत करने वाले कर्मचारियों को गंभीरता से सुनने के बजाय उन्हें टालने की प्रवृत्ति बढ़ी है। यही कारण है कि अब कर्मचारी संगठनों का आक्रोश सीधे जेडी शिक्षा विभाग के खिलाफ दिखाई देने लगा है।श्याम मूरत कौशिक ने साफ कहा कि यदि 31 मई तक जांच प्रारंभ कर जिम्मेदारों पर कार्रवाई नहीं की गई, तो 16 जून का आंदोलन केवल सांकेतिक नहीं होगा, बल्कि इसे व्यापक कर्मचारी आंदोलन का रूप दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि इसकी पूरी जिम्मेदारी शिक्षा विभाग और प्रशासन की होगी।अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर जेडी शिक्षा विभाग एक साल से जांच को लंबित क्यों रखे हुए हैं? क्या यह केवल प्रशासनिक लापरवाही है या फिर विभागीय संरक्षण का मामला? आने वाले दिनों में शिक्षा विभाग की भूमिका पर सबकी नजरें टिकी रहेंगी।


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