इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ साइंस कर्नाटक प्रशिक्षण में डॉ. राकेश कुर्रे का उत्कृष्ट प्रदर्शन से मिला सर्वोच्च सम्मान।

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तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी

बिलासपुर जिले के शासकीय जे. एम. पी. महाविद्यालय, तखतपुर के लिए यह अत्यंत हर्ष एवं गौरव का विषय है कि महाविद्यालय के सहायक प्राध्यापक (भौतिकी) डॉ. राकेश कुमार कुर्रे को इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ साइंस (आईआईएससी), चाल्लाकेरे परिसर, कर्नाटक में आयोजित टैलेंट डेवलपमेंट सेंटर के अंतर्गत “एडवांस्ड रिफ्रेशर कोर्स (भौतिकी)” में उत्कृष्ट प्रदर्शन हेतु “बेस्ट परफॉर्मिंग पार्टिसिपेट“ सम्मान से सम्मानित किया गया।यह प्रतिष्ठित 15 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम चित्रदुर्ग (कर्नाटक) स्थित चाल्लाकेरे परिसर में आयोजित किया गया, जिसमें देशभर के विभिन्न राज्यों से चयनित प्रतिभागियों ने भाग लिया। डॉ. राकेश कुमार कुर्रे ने अपने उत्कृष्ट प्रोजेक्ट कार्य, सक्रिय सहभागिता एवं विषय की गहन समझ के माध्यम से यह विशेष उपलब्धि अर्जित की।प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को मैकेनिक्स , क्वांटम मेकैनिज्म, मैटेरियल साइंस, वेव ऑप्टिक्स, श्रोडिंगर इक्वेशन, जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर उन्नत व्याख्यान प्रदान किए गए। साथ ही ओरिजिन सॉफ्टवेयर एव पाइथन प्रोग्रामिंग पर हैंड्स ऑन ट्रेनिंग गई तथा विभिन्न प्रायोगिक कार्यों के माध्यम से विषय की अवधारणाओं को व्यवहारिक रूप से समझाया गया। इससे प्रशिक्षण अत्यंत उपयोगी एवं प्रभावी सिद्ध हुआ।चाल्लाकेरे स्थित इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ साइंस का विशाल, हरित एवं शांत परिसर अपनी प्राकृतिक सुंदरता एवं उत्कृष्ट शैक्षणिक वातावरण के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध है। यहाँ समय प्रबंधन की सुव्यवस्थित व्यवस्था ने प्रशिक्षण को अनुशासित एवं सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में महाविद्यालय से दो प्राध्यापक—डॉ. एस. के. पांडे, प्राध्यापक (गणित) एवं डॉ. राकेश कुमार कुर्रे, सहायक प्राध्यापक (भौतिकी)—ने सहभागिता की। कार्यक्रम में भौतिकी विषय के समन्वयक डॉ. किशोर कुमार तथा उनके सहयोगी डॉ. अनुप कुमार एवं दयानंद जी के कुशल मार्गदर्शन एवं समर्पित प्रयासों से प्रशिक्षण अत्यंत प्रभावशाली एवं ज्ञानवर्धक बना।प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थलों— हंपी तथा चित्रादुर्गा फोर्ट—का शैक्षणिक भ्रमण भी कराया गया। इस भ्रमण ने प्रतिभागियों को भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत एवं स्थापत्य कला से परिचित कराया, जिससे प्रशिक्षण का अनुभव और अधिक समृद्ध हुआ।महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. विनोद कुमार दुबे ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह सम्मान न केवल डॉ. राकेश कुमार कुर्रे की व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि सम्पूर्ण महाविद्यालय के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस प्रकार की उपलब्धियाँ अन्य शिक्षकों एवं विद्यार्थियों को भी उत्कृष्टता की दिशा में प्रेरित करेंगी।अंत में, महाविद्यालय परिवार के समस्त प्राध्यापकों एवं कर्मचारियों के साथ-साथ डॉ. राकेश कुमार कुर्रे के परिवार के सदस्यों ने भी इस महत्वपूर्ण उपलब्धि पर हर्ष व्यक्त करते हुए उन्हें हार्दिक बधाई एवं उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएँ दी हैं।


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