नन्हे हाथों का साहस, जीवन की नई सांस…..13 वर्षीय कराटे खिलाड़ी कल्पना गेदरे ने चलती ट्रेन में सीपीआर देकर बचाई यात्री की जान।

Share Now

तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी

कभी-कभी इतिहास बड़े मंचों पर नहीं, बल्कि सामान्य परिस्थितियों में जन्म लेता है। जब संकट सामने खड़ा होता है, तब उम्र नहीं, साहस और संस्कार बोलते हैं।”दिनांक 17 मई 2026 की रात, जब 22वीं ऑल इंडिया कराटे चैंपियनशिप, देहरादून में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने के बाद रेन सिन कान कराटे छत्तीसगढ़ की टीम कालिंगा उत्कल पुरी-हरिद्वार एक्सप्रेस से वापस बिलासपुर लौट रही थी, तब किसी ने कल्पना भी नहीं की थी कि यह यात्रा एक ऐसी घटना की साक्षी बनेगी, जो मानवता, साहस और प्रशिक्षण के अद्भुत संगम का उदाहरण बन जाएगी।रात्रि का समय था। अधिकांश यात्री विश्राम की तैयारी में थे। अचानक ट्रेन के एक कोच में चीख-पुकार और अफरा-तफरी का माहौल बन गया। जानकारी मिली कि पैंट्री कार में कार्यरत एक कर्मचारी द्वारा एक यात्री के साथ विवाद और मारपीट की गई थी। विवाद के दौरान कर्मचारी ने पानी ढोने वाली बाल्टी से यात्री के पैर के अंगूठे पर प्रहार कर दिया, जिससे उसे गंभीर चोट आई और रक्तस्राव होने लगा।घटना यहीं समाप्त नहीं हुई। घायल यात्री मानसिक रूप से अत्यंत व्यथित और भयभीत हो गया। कुछ समय बाद जब वह अपनी सीट से उठकर पानी लेने गया, तभी अचानक उसे गंभीर हृदयाघात जैसी स्थिति उत्पन्न हुई। देखते ही देखते वह अचेत होकर ट्रेन के फर्श पर गिर पड़ा। उसके साथ यात्रा कर रही पत्नी और छोटा पुत्र घबराकर जोर-जोर से सहायता की गुहार लगाने लगे। पूरे डिब्बे में भय और असमंजस का वातावरण व्याप्त हो गया।इसी दौरान शोर सुनकर रेन सिन कान कराटे छत्तीसगढ़ के तकनीकी कोच अखिलेश आदित्य मौके पर पहुंचे। स्थिति की गंभीरता को समझते हुए उन्होंने तत्काल टीम प्रमुख रामाकांत एस. मिश्रा को पूरी जानकारी दी। टीम के सदस्यों के बीच चर्चा हुई कि क्या किसी को सीपीआर (Cardio Pulmonary Resuscitation) देना आता है।तभी एक आशा की किरण सामने आई।टीम की मात्र 13 वर्षीय छात्रा कुमारी कल्पना गेदरे ने बताया कि उसे विद्यालय में सीपीआर का प्रशिक्षण दिया गया है और आवश्यकता पड़ने पर वह प्रयास कर सकती है।उस समय किसी ने यह नहीं सोचा होगा कि एक छोटी-सी ग्रामीण बालिका कुछ ही क्षणों में जीवन और मृत्यु के बीच संघर्ष कर रहे व्यक्ति के लिए देवदूत बन जाएगी।कल्पना तत्काल अचेत यात्री के पास पहुंची। उसने बिना घबराए, बिना समय गंवाए, विद्यालय में सीखे गए प्रशिक्षण और अपने आत्मविश्वास के आधार पर लगातार सीपीआर देना प्रारंभ किया। दूसरी ओर अखिलेश आदित्य एवं रामाकांत एस. मिश्रा द्वारा यात्री की नाड़ी की जांच की गई तथा उपलब्ध संसाधनों से प्राथमिक स्वास्थ्य सहायता प्रदान की गई।स्थिति की गंभीरता को देखते हुए रेलवे हेल्पलाइन और चिकित्सा सहायता के लिए तत्काल संपर्क किया गया, किंतु काफी समय तक कोई चिकित्सक उपलब्ध नहीं हो सका। ऐसे चुनौतीपूर्ण समय में कल्पना ने अद्भुत धैर्य, संयम और साहस का परिचय दिया। वह लगातार घायल यात्री की निगरानी करती रही और आवश्यकतानुसार सीपीआर देती रही।कुछ समय पश्चात यात्री की स्थिति में सुधार दिखाई देने लगा। उसकी चेतना लौटने लगी और धीरे-धीरे वह सामान्य अवस्था में आने लगा। उसकी पत्नी और पुत्र की आंखों में राहत के आंसू थे। जिस परिवार के सामने कुछ क्षण पहले अंधकार छा गया था, वहां फिर से आशा का प्रकाश लौट आया था।यह केवल एक चिकित्सकीय सहायता नहीं थी; यह मानवता का वह उज्ज्वल स्वरूप था, जिसमें एक बालिका ने अपने ज्ञान, साहस और संवेदनशीलता से किसी अनजान व्यक्ति के जीवन को बचाने का प्रयास किया।गांव की बेटी, राष्ट्रीय मंच की विजेतारायपुर जिले के खरोरा विकासखंड की निवासी कुमारी कल्पना गेदरे साधारण ग्रामीण परिवेश से आती हैं। वे पीएम भारत देवांगन विद्यालय की कक्षा दसवीं की छात्रा हैं और हाल ही में दसवीं बोर्ड परीक्षा में 81 प्रतिशत अंक प्राप्त कर उत्कृष्ट सफलता अर्जित की है।शैक्षणिक उपलब्धियों के साथ-साथ खेल जगत में भी उनका प्रदर्शन उल्लेखनीय रहा है। देहरादून में आयोजित 22वीं ऑल इंडिया कराटे चैंपियनशिप 2026 में उन्होंने अपने वर्ग की काता एवं कुमिते स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर छत्तीसगढ़ का गौरव बढ़ाया है।किन्तु खेल मैदान में जीता गया स्वर्ण पदक भी उस मानवीय उपलब्धि के सामने छोटा प्रतीत होता है, जो उन्होंने चलती ट्रेन में संकटग्रस्त यात्री की सहायता कर अर्जित की है।शिक्षा का वास्तविक उद्देश्यआज जब शिक्षा को अक्सर केवल परीक्षा और अंकों तक सीमित कर दिया जाता है, तब कल्पना गेदरे की यह घटना हमें याद दिलाती है कि विद्यालयों में दिया जाने वाला जीवनोपयोगी प्रशिक्षण किस प्रकार किसी की जान बचाने में सहायक हो सकता है।यह घटना इस बात का भी प्रमाण है कि यदि बच्चों को सही दिशा, उचित प्रशिक्षण और मानवीय संस्कार दिए जाएं, तो वे समाज के लिए असाधारण योगदान दे सकते हैं।सम्मान की पात्र है यह बहादुर बालिकाकुमारी कल्पना गेदरे का यह कार्य केवल व्यक्तिगत साहस का उदाहरण नहीं, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का विषय है। ऐसी प्रतिभाशाली, संवेदनशील और साहसी बालिका को शासन-प्रशासन तथा विभिन्न सामाजिक संगठनों द्वारा सम्मानित किया जाना चाहिए, ताकि अन्य बच्चों को भी मानव सेवा, साहस और सामाजिक उत्तरदायित्व की प्रेरणा मिल सके।आज जब समाज को संवेदनशील नागरिकों की आवश्यकता है, तब खरोरा की यह नन्ही बेटी हमें विश्वास दिलाती है कि भारत का भविष्य सुरक्षित हाथों में है।वास्तव में, स्वर्ण पदक जीतना बड़ी उपलब्धि है, किंतु किसी की जीवन-डोर थाम लेना उससे भी बड़ा गौरव है। कल्पना गेदरे ने सिद्ध कर दिया है कि साहस की कोई आयु नहीं होती और मानवता से बड़ा कोई धर्म नहीं होता।


Share Now

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You cannot copy content of this page

error: Content is protected !!