सीईओ वर्मा के पुत्र आशिष बने सीनियर साइंटिस्ट,कृषि अनुसंधान के क्षेत्र में हासिल की बड़ी उपलब्धि, क्षेत्र में हर्ष का माहौल।

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तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी

जांजगीर-चांपा जिले के नवागढ़ जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) बी.आर. वर्मा के पुत्र आशिष वर्मा ने अपनी प्रतिभा, कठिन परिश्रम और लगन के बल पर एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए भारत सरकार के कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली में सीनियर साइंटिस्ट (वरिष्ठ वैज्ञानिक) के पद पर चयनित होकर जिले और प्रदेश का नाम गौरवान्वित किया है।आशिष वर्मा की इस उपलब्धि से उनके परिवार, मित्रों, शुभचिंतकों तथा पूरे क्षेत्र में खुशी की लहर है। कृषि अनुसंधान जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में देश की सर्वोच्च संस्थाओं में से एक में वरिष्ठ वैज्ञानिक के पद पर नियुक्ति को बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। यह सफलता न केवल उनके व्यक्तिगत परिश्रम का परिणाम है, बल्कि युवाओं के लिए भी प्रेरणास्रोत बन गई है।बताया जाता है कि आशिष वर्मा प्रारंभ से ही मेधावी छात्र रहे हैं। उन्होंने अपनी शिक्षा के दौरान कृषि विज्ञान और अनुसंधान के क्षेत्र में विशेष रुचि दिखाई तथा लगातार अध्ययन और शोध कार्यों के माध्यम से अपनी पहचान बनाई। वर्षों की मेहनत और समर्पण के बाद उन्हें यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिली है।कृषि क्षेत्र देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। ऐसे में वरिष्ठ वैज्ञानिक के रूप में आशिष वर्मा किसानों की उन्नति, नई कृषि तकनीकों के विकास, उत्पादकता वृद्धि तथा कृषि अनुसंधान को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उनकी नियुक्ति से छत्तीसगढ़ सहित देशभर के कृषि शोध कार्यों को भी लाभ मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।आशिष वर्मा के चयन की खबर मिलते ही जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों, शिक्षाविदों, सामाजिक संगठनों तथा शुभचिंतकों ने उन्हें बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। लोगों ने कहा कि यह उपलब्धि जिले के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है और यह साबित करती है कि दृढ़ संकल्प और निरंतर मेहनत से कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।नवागढ़ जनपद पंचायत के अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने भी सीईओ बी.आर. वर्मा को बधाई देते हुए आशिष वर्मा के उज्ज्वल भविष्य की कामना की है। क्षेत्रवासियों का मानना है कि उनकी यह सफलता आने वाली पीढ़ी को शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेगी।आशिष वर्मा की यह उपलब्धि न केवल उनके परिवार के लिए गर्व का विषय है, बल्कि जांजगीर-चांपा जिले और पूरे छत्तीसगढ़ के लिए भी सम्मान की बात है।


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