तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी

छत्तीसगढ़ शासन द्वारा हाल ही में जारी संशोधित भर्ती नियमों के तहत कनिष्ठ सचिवालय सहायक पद पर पदोन्नति के लिए निर्धारित कंप्यूटर दक्षता परीक्षा के नए मानकों को लेकर अब कर्मचारी संगठनों ने भी आपत्ति दर्ज कराई है। छत्तीसगढ़ मंत्रालयीन कर्मचारी संघ ने मुख्य सचिव को ज्ञापन सौंपकर परीक्षा के स्वरूप और अंकों के निर्धारण में संशोधन की मांग की है।गौरतलब है कि इस मुद्दे को सर्वव्यापी ने प्रमुखता के साथ पहले ही प्रकाशित करते हुए सवाल उठाया था कि वर्षों से मंत्रालय में कार्यरत कर्मचारियों के अनुभव और कार्यकुशलता की अनदेखी कर नई शर्तें लागू करना कई कर्मचारियों के लिए अन्यायपूर्ण साबित हो सकता है। अब उसी विषय पर कर्मचारी संगठन ने भी औपचारिक रूप से शासन का ध्यान आकर्षित किया है।ज्ञापन में संघ के अध्यक्ष चन्द्रकांत पाण्डेय ने उल्लेख किया है कि सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा 20 जून 2025 को जारी अधिसूचना के अनुसार कनिष्ठ सचिवालय सहायक पद पर पदोन्नति के लिए कंप्यूटर एवं सॉफ्टवेयर के माध्यम से 5000 की-डिप्रेशन प्रति घंटे की गति का प्रमाण पत्र अनिवार्य किया गया है। संघ का कहना है कि मंत्रालय की कार्यप्रणाली और कर्मचारियों की वास्तविक परिस्थितियों को देखते हुए इस शर्त पर पुनर्विचार आवश्यक है।संघ ने तर्क दिया है कि मंत्रालयीन सेवा में लंबे समय से यह व्यवस्था रही है कि कर्मचारियों की कंप्यूटर दक्षता परीक्षा राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी) के माध्यम से मंत्रालय स्थित कंप्यूटर लैब में आयोजित की जाती रही है। एनआईसी केवल मंत्रालय ही नहीं, बल्कि शासन के अनेक महत्वपूर्ण विभागों की तकनीकी और सूचनात्मक सेवाओं का संचालन करता है। ऐसे में आगामी परीक्षाएं भी पूर्ववत एनआईसी के माध्यम से ही आयोजित की जानी चाहिए।ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि 5000 की-डिप्रेशन प्रति घंटे की गति चतुर्थ श्रेणी से पदोन्नत होकर कनिष्ठ सचिवालय सहायक पद पर कार्यरत कर्मचारियों के लिए अत्यधिक चुनौतीपूर्ण है। ऐसे अनेक कर्मचारी वर्षों से मंत्रालय में कार्य करते हुए फाइलों के संपादन और निस्तारण का व्यापक अनुभव रखते हैं तथा प्रशासनिक कार्यों में दक्ष हैं। इसलिए केवल टाइपिंग गति के आधार पर उनकी पदोन्नति प्रभावित करना उचित नहीं होगा।कर्मचारी संघ ने शासन से मांग की है कि निर्धारित 5000 की-डिप्रेशन प्रति घंटे की सीमा को घटाकर 3000 की-डिप्रेशन किया जाए तथा परीक्षा का संचालन एनआईसी के माध्यम से मंत्रालय परिसर में ही कराया जाए।राज्य के कर्मचारी वर्ग में इस विषय को लेकर लगातार चर्चा बनी हुई है। कर्मचारियों का मानना है कि पदोन्नति की प्रक्रिया में तकनीकी दक्षता महत्वपूर्ण अवश्य है, लेकिन वर्षों के अनुभव, कार्य निष्पादन क्षमता और प्रशासनिक ज्ञान को भी समान महत्व मिलना चाहिए।उल्लेखनीय है कि सर्वव्यापी ने इस मुद्दे को सबसे पहले प्रमुखता से उठाते हुए चेताया था कि नई व्यवस्था से बड़ी संख्या में मंत्रालयीन कर्मचारी प्रभावित हो सकते हैं। अब कर्मचारी संगठन द्वारा मुख्य सचिव को ज्ञापन सौंपे जाने के बाद यह विषय शासन के समक्ष औपचारिक रूप से पहुंच गया है। ऐसे में देखना होगा कि सरकार कर्मचारियों की मांगों पर कितना सकारात्मक निर्णय लेती है और भर्ती नियमों में संशोधन अथवा व्यावहारिक राहत प्रदान करती है या नहीं।