विकास नंद/ सर्वव्यापी
खरीफ सीजन 2026 को देखते हुए जिले में किसानों को समय पर उर्वरक उपलब्ध कराने के लिए प्रशासन सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है। जिले की सहकारी समितियों एवं निजी उर्वरक विक्रेताओं के माध्यम से किसानों को यूरिया, डीएपी सहित अन्य रासायनिक उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है। कलेक्टर विनय कुमार लंगेह द्वारा प्रतिदिन खाद-बीज की उपलब्धता, भंडारण और वितरण की समीक्षा की जा रही है।जिला विपणन अधिकारी के अनुसार जिले की 159 सहकारी समितियों में उर्वरकों का पर्याप्त भंडारण किया गया है तथा किसानों की मांग के अनुरूप लगातार वितरण किया जा रहा है। खरीफ वर्ष 2026 के लिए जिले को 60 हजार 850 टन रासायनिक उर्वरकों का लक्ष्य प्राप्त हुआ है। इसके विरुद्ध अब तक 16 हजार 294 टन से अधिक उर्वरकों का भंडारण किया जा चुका है, जो निर्धारित लक्ष्य का लगभग 26.78 प्रतिशत है। वहीं किसानों को अब तक 7 हजार 720 टन उर्वरकों का वितरण किया जा चुका है।भंडारित उर्वरकों में 11 हजार 338 टन यूरिया, 1 हजार 928 टन डीएपी, 449 टन एनपीके तथा 1 हजार 496 टन एसएसपी शामिल हैं। जिले की विभिन्न सहकारी समितियों में किसान नियमित रूप से खाद का उठाव कर रहे हैं।तोरेसिंहा सहकारी समिति बेलमुंडी के अंतर्गत अब तक 108 किसानों को खाद का वितरण किया गया है। गांव के किसान कमलेश ने बताया कि उन्हें आसानी से 8 बोरी यूरिया और 3 बोरी डीएपी प्राप्त हुआ। वहीं किसानों शरद और गुलाल ने भी बताया कि उन्हें बिना किसी परेशानी के डीएपी और यूरिया उपलब्ध हो गया है।कलेक्टर के निर्देश पर कृषि विभाग उर्वरक कंपनियों से अतिरिक्त रैक प्राप्त कर लगातार भंडारण बढ़ा रहा है, ताकि खरीफ सीजन के दौरान किसानों को किसी प्रकार की समस्या का सामना न करना पड़े। साथ ही समितियों और निजी विक्रेताओं के यहां नियमित निरीक्षण भी कराया जा रहा है।प्रशासन द्वारा खाद की कालाबाजारी, जमाखोरी और अनियमित वितरण पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि किसानों को निर्धारित दर पर गुणवत्तायुक्त उर्वरक उपलब्ध कराया जाए तथा मांग और आपूर्ति की दैनिक मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए।जिला प्रशासन ने किसानों से अपील की है कि वे केवल अधिकृत सहकारी समितियों और लाइसेंसधारी विक्रेताओं से ही पॉस मशीन के माध्यम से उर्वरक खरीदें तथा खरीद की रसीद अवश्य प्राप्त करें। किसी भी प्रकार की अनियमितता की जानकारी तत्काल कृषि विभाग को देने की भी अपील की गई है।