विकास नंद/ सर्वव्यापी
महासमुंद जिले में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के मंशानुरूप जीरों टॉरलेंस निती को अपनाते हुए किसानों को समय पर खाद उपलब्ध कराने और उर्वरकों की कालाबाजारी पर रोक लगाने के लिए चलाए जा रहे प्रशासनिक अभियान के बीच कुछ निलंबित अधिकारियों द्वारा भ्रामक खबरों के माध्यम से जिला प्रशासन और राज्य सरकार की छवि धूमिल करने का प्रयास किया जा रहा है। लेकिन कलेक्टर विनय कुमार लंगेह की सख्त कार्यशैली और पारदर्शी प्रशासनिक दृष्टिकोण ने स्पष्ट कर दिया है कि किसानों के हितों से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाएगा।
जानकारी के अनुसार सरायपाली और बागबाहरा विकासखंड में खाद वितरण व्यवस्था की जांच के दौरान गंभीर अनियमितताएं सामने आई थीं। कलेक्टर के निर्देश पर गठित जांच टीम ने विभिन्न खाद व्यापारियों के गोदामों का सत्यापन किया, जिसमें कई स्थानों पर रिकॉर्ड और वास्तविक भंडारण में भारी अंतर पाया गया। सरायपाली स्थित एक खाद प्रतिष्ठान में निर्धारित स्टॉक से कहीं अधिक मात्रा में उर्वरक का भंडारण मिला, जिसने प्रशासन की आशंकाओं को सही साबित कर दिया।
प्रशासनिक सूत्रों का मानना है कि कृषि अधिकारियों और कुछ व्यापारियों की मिलीभगत के बिना इस प्रकार की अनियमितताएं संभव नहीं हैं। किसानों को खाद के लिए भटकना पड़े और दूसरी ओर गोदामों में बड़ी मात्रा में उर्वरक जमा मिले, यह स्थिति प्रशासन के लिए गंभीर चिंता का विषय थी। इसी आधार पर संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करते हुए कार्रवाई की गई।
कलेक्टर विनय कुमार लंगेह ने स्पष्ट संदेश दिया है कि जिले में खाद की कालाबाजारी, कृत्रिम अभाव पैदा करने और किसानों का शोषण करने वाले किसी भी व्यक्ति या समूह को बख्शा नहीं जाएगा। उनके नेतृत्व में प्रशासन लगातार निगरानी कर रहा है ताकि खरीफ सीजन के दौरान किसानों को यूरिया और डीएपी जैसी आवश्यक खाद समय पर उपलब्ध हो सके।इधर, कार्रवाई से प्रभावित कुछ अधिकारियों द्वारा चुनिंदा मीडिया माध्यमों में प्रशासन के खिलाफ खबरें प्रकाशित कराए जाने की चर्चा भी सामने आ रही है।
प्रशासनिक हलकों में इसे अनुशासनात्मक कार्रवाई से उपजी नाराजगी का परिणाम माना जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि कार्रवाई पूरी तरह तथ्यों और जांच रिपोर्टों के आधार पर की गई है तथा इसका उद्देश्य केवल किसानों के हितों की रक्षा करना है।जिले के विभिन्न विकासखंडों में जारी निरीक्षण अभियान के दौरान और भी अनियमितताओं के सामने आने की संभावना जताई जा रही है।
प्रशासन का मानना है कि वर्षों से चली आ रही कुछ व्यवस्थागत कमियों को दूर करने के लिए कठोर निर्णय आवश्यक हैं। यही कारण है कि कलेक्टर लंगेह लगातार जमीनी स्तर पर मॉनिटरिंग कर रहे हैं और संबंधित विभागों को जवाबदेह बना रहे हैं।
किसान संगठनों और जागरूक नागरिकों का भी मानना है कि यदि खाद की कालाबाजारी और अवैध भंडारण पर समय रहते कार्रवाई नहीं की जाती, तो खरीफ सीजन में हजारों किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता था। ऐसे में प्रशासन की सक्रियता किसानों के हित में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है।जिले में सुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही को प्राथमिकता देते हुए कलेक्टर विनय कुमार लंगेह ने यह स्पष्ट कर दिया है कि किसानों के अधिकारों पर डाका डालने वालों के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी, चाहे वह कोई भी हो।