तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के जिला शिक्षा अधिकारी के रूप में 11 जुलाई 2025 को पदस्थापना के बाद से रजनीश तिवारी ने विषम परिस्थितियों के बावजूद अपने दायित्वों के निर्वहन में उल्लेखनीय प्रतिबद्धता दिखाई है। पदभार ग्रहण करने के कुछ ही समय बाद गृह जिला बिलासपुर आगमन के दौरान वे एक सड़क दुर्घटना में घायल हो गए थे। दुर्घटना में उनके हाथ में गंभीर चोट आई, जिसके चलते उन्हें चिकित्सकीय सलाह पर कुछ दिनों का अवकाश लेना पड़ा।हालांकि शारीरिक पीड़ा और स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों के बावजूद रजनीश तिवारी ने अपने दायित्वों से दूरी नहीं बनाई। लगभग 10 से 15 दिनों के उपचार और विश्राम के बाद उन्होंने पुनः कार्यभार संभाला और जिले की शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने की दिशा में सक्रिय प्रयास शुरू किए। शिक्षा विभाग से जुड़े अधिकारियों, शिक्षकों और कर्मचारियों का कहना है कि दुर्घटना के बाद भी उन्होंने नियमित रूप से विभागीय गतिविधियों की समीक्षा की तथा विभिन्न प्रशासनिक और शैक्षणिक मुद्दों के समाधान के लिए लगातार पहल की।जिले में शैक्षणिक गुणवत्ता सुधार, विद्यालयों की व्यवस्थाओं की निगरानी, लंबित प्रकरणों के निराकरण तथा शिक्षकों एवं कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान को लेकर उनकी सक्रियता चर्चा का विषय रही है। विभागीय सूत्रों के अनुसार उन्होंने पदस्थापना के बाद विद्यालयों के संचालन, शैक्षणिक परिणामों में सुधार और प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता लाने पर विशेष ध्यान दिया।शिक्षक संगठनों और विभागीय कर्मचारियों का भी मानना है कि कठिन व्यक्तिगत परिस्थितियों के बावजूद रजनीश तिवारी ने शिक्षा विभाग की जिम्मेदारियों को प्राथमिकता दी। कई मामलों में उन्होंने स्वयं हस्तक्षेप कर कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान का प्रयास किया, जिससे विभागीय कार्यों में गति आई।गौरतलब है कि किसी भी प्रशासनिक अधिकारी के लिए नई जिम्मेदारी संभालने के तुरंत बाद दुर्घटना जैसी स्थिति चुनौतीपूर्ण होती है, लेकिन रजनीश तिवारी ने इस चुनौती को अपने कार्य के मार्ग में बाधा नहीं बनने दिया। यही कारण है कि उनके कार्यकाल को जिले में शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में समर्पित प्रयासों के रूप में देखा जा रहा है।जिले के शिक्षा जगत में यह चर्चा आम है कि शारीरिक असुविधा और व्यक्तिगत कठिनाइयों के बावजूद जिस तरह उन्होंने अपने दायित्वों का निर्वहन किया, वह प्रशासनिक सेवा में कर्तव्यनिष्ठा और प्रतिबद्धता का एक सकारात्मक उदाहरण माना जा सकता है।