विकास नंद/ सर्वव्यापी
विकासखंड सरायपाली के ग्राम आंवलाचक्का स्थित आंगनबाड़ी केंद्र क्रमांक-02 (बी) में कथित अनियमितताओं और लापरवाही को लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। ग्रामीणों ने जनदर्शन में पहुंचकर जिला कलेक्टर को शिकायत सौंपते हुए केंद्र में व्याप्त अव्यवस्थाओं की उच्चस्तरीय जांच कराने तथा आंगनबाड़ी कार्यकर्ता लकेश्वरी ताण्डी एवं सहायिका डिग्रीमोती उरांव को पद से हटाकर कठोर कार्रवाई करने की मांग की है।ग्रामीणों का आरोप है कि केंद्र में लंबे समय से समेकित बाल विकास सेवा (आईसीडीएस) योजना के अंतर्गत संचालित गतिविधियों का समुचित संचालन नहीं हो रहा है, जिससे बच्चों, किशोरी बालिकाओं, गर्भवती महिलाओं और शिशुवती माताओं को मिलने वाली पोषण एवं स्वास्थ्य संबंधी सुविधाएं प्रभावित हो रही हैं।शिकायत के अनुसार 14 से 18 वर्ष आयु वर्ग की किशोरियों का नियमित पंजीयन नहीं किया जा रहा है और उन्हें पूरक पोषण आहार का लाभ भी नहीं मिल पा रहा है। वहीं कई गर्भवती एवं शिशुवती महिलाओं का समय पर पंजीयन नहीं होने से वे शासन की विभिन्न योजनाओं से वंचित हैं।ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि 3 से 6 वर्ष तक के बच्चों को नियमित रूप से केंद्र नहीं बुलाया जाता, जिससे उनकी प्रारंभिक शिक्षा, स्वास्थ्य परीक्षण और पोषण संबंधी गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं। कई बार केंद्र बंद रहने के कारण हितग्राहियों को निराश होकर लौटना पड़ता है।शिकायत में यह भी कहा गया है कि बच्चों के वजन मापन और वृद्धि निगरानी कार्यक्रम का नियमित संचालन नहीं हो रहा है। इसके चलते कुपोषण और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं की समय पर पहचान प्रभावित हो रही है। साथ ही गोद भराई, अन्नप्राशन और मातृ-शिशु कल्याण से जुड़े कार्यक्रमों के नियमित आयोजन नहीं होने की बात भी ग्रामीणों ने उठाई है।ग्रामीणों का आरोप है कि निर्धारित मेन्यू के अनुसार गरम और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने के बजाय कई अवसरों पर केवल बिस्किट वितरित किए गए। यदि यह तथ्य सही पाया जाता है तो यह बच्चों के पोषण अधिकारों की गंभीर उपेक्षा का मामला होगा।शिकायतकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि कई पात्र हितग्राहियों का पंजीयन नहीं किया गया, जिससे वे पोषण आहार और अन्य शासकीय योजनाओं के लाभ से वंचित रह गए। योजनाओं के संचालन में पारदर्शिता और जवाबदेही के अभाव के साथ-साथ हितग्राहियों के साथ भेदभावपूर्ण व्यवहार की भी शिकायत की गई है।ग्रामीणों का कहना है कि योजनाओं की जानकारी लेने या शिकायत करने पर सहायिका और उनके परिजनों द्वारा अभद्र व्यवहार तथा दबाव बनाने की कोशिश की जाती है, जिससे गांव में असंतोष का माहौल है।ग्रामीणों के अनुसार इस संबंध में पूर्व में महिला एवं बाल विकास विभाग सहित संबंधित अधिकारियों को कई बार मौखिक और लिखित शिकायतें दी जा चुकी हैं। समाचार माध्यमों में मामला उठने के बावजूद अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई, जिससे लोगों में नाराजगी बढ़ी है।जनदर्शन में दिए गए आवेदन में ग्रामीणों ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। साथ ही यदि जांच में किसी अधिकारी की उदासीनता या संरक्षण की भूमिका सामने आती है तो उनके विरुद्ध भी प्रशासनिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।इस दौरान सुरोतीलाल लकड़ा, हेमकुमार यादव, माधवदास मानिकपुरी, देवकुमार लकड़ा सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे। ग्रामीणों ने कहा कि यह केवल प्रशासनिक लापरवाही का मामला नहीं, बल्कि बच्चों, किशोरियों, गर्भवती महिलाओं और शिशुवती माताओं के स्वास्थ्य, पोषण और अधिकारों से जुड़ा अत्यंत संवेदनशील विषय है। उन्होंने जिला प्रशासन से मामले की गंभीरता को देखते हुए शीघ्र और प्रभावी कार्रवाई की अपेक्षा जताई है।