80 किमी पदयात्रा के बाद दंतेवाड़ा में गरजे आंदोलनकारी, कलेक्टर की अनुपस्थिति पर जताया रोष, 15 दिन का अल्टीमेटम।

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तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी

दंतेवाड़ा बैलाडीला क्षेत्र की पहाड़ियों, जंगलों, नदियों तथा आदिवासी समाज के आराध्य पेन देव स्थलों की रक्षा की मांग को लेकर निकाली गई 80 किलोमीटर लंबी पदयात्रा का समापन 11 जून को दंतेवाड़ा में हुआ। बस्तरिया राज्य मोर्चा के नेतृत्व में आयोजित इस पदयात्रा के समापन अवसर पर कलेक्टोरेट के समक्ष विशाल जनसभा आयोजित की गई, जहां आंदोलनकारियों ने कथित अवैध खनन गतिविधियों और आदिवासी क्षेत्रों में हो रहे हस्तक्षेप के खिलाफ आवाज बुलंद की।मोर्चा के अध्यक्ष एवं पूर्व विधायक मनीष कुंजाम के नेतृत्व में 7 जून से शुरू हुई यह पदयात्रा आलनार पहाड़ियों से प्रारंभ होकर किरंदुल, बचेली और गीदम होते हुए दंतेवाड़ा जिला मुख्यालय पहुंची। यात्रा में बैलाडीला क्षेत्र के हजारों आदिवासी ग्रामीण, महिला-पुरुष, युवा तथा सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भाग लिया।जनसभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने आरोप लगाया कि बैलाडीला क्षेत्र में विकास और खनन के नाम पर आदिवासियों की जल, जंगल और जमीन पर लगातार अतिक्रमण किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र की प्राकृतिक संपदा और धार्मिक आस्था के केंद्रों को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों पर तत्काल रोक लगाई जानी चाहिए।सभा के बाद मोर्चा के प्रतिनिधिमंडल ने जिला प्रशासन को अपनी विभिन्न मांगों का ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में विशेष रूप से “आर सेलर कंपनी” के खिलाफ जांच कर कानूनी कार्रवाई करने तथा उसके कथित अवैध कार्यों पर तत्काल रोक लगाने की मांग की गई।इस दौरान आंदोलनकारियों ने जिला कलेक्टर की अनुपस्थिति पर भी नाराजगी व्यक्त की। पदयात्रा में शामिल लोगों का कहना था कि बैलाडीला से दंतेवाड़ा तक 80 किलोमीटर पैदल चलकर पहुंचे प्रतिनिधिमंडल से मिलने और ज्ञापन लेने के लिए कलेक्टर कार्यालय में उपस्थित नहीं रहे, जिससे आंदोलनकारियों में भारी आक्रोश देखा गया। बाद में ज्ञापन कार्यालय में मौजूद एसडीएम को सौंपा गया।मोर्चा ने प्रशासन को 15 दिनों का अल्टीमेटम देते हुए चेतावनी दी है कि यदि 26 जून 2026 तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई शुरू नहीं की गई तो दंतेवाड़ा कलेक्टर कार्यालय के समक्ष पुनः व्यापक धरना-प्रदर्शन और आंदोलन किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।ज्ञापन में बैलाडीला रिजर्व फॉरेस्ट क्षेत्र में सभी प्रकार के खनन कार्यों पर रोक लगाने, आदिवासी पेन स्थलों एवं धार्मिक आस्था केंद्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने, संबंधित कंपनी के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने तथा पेसा कानून एवं वन अधिकार अधिनियम-2006 का कड़ाई से पालन कराने की मांग प्रमुख रूप से शामिल है।पदयात्रा में मूल निवासी संघ छत्तीसगढ़ के प्रदेश अध्यक्ष अमरजीत पटेल, प्रदेश उपाध्यक्ष श्याम मूरत कौशिक, जॉस थॉमस, महासचिव शाजी जॉन, भू-वैज्ञानिक एवं सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. आशियादिन, वरिष्ठ पत्रकार कमल शुक्ला तथा सामाजिक कार्यकर्ता एवं पत्रकार रमेश सिंह ठाकुर सहित अनेक सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल रहे।बस्तरिया राज्य मोर्चा ने स्पष्ट किया है कि जल, जंगल और जमीन की रक्षा तथा आदिवासी अधिकारों के संरक्षण के लिए उनका संघर्ष आगे भी जारी रहेगा।


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