तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी

गरीबी के कारन कभू इस्कूल के मुख ल नइ देख पाइन। फेर अनपढ़ होय के बाद घलो अपन असाधारन कला, अथक साधना अउ प्रतिभा के बल म “डॉक्टरेट” के सम्मान पाइन। अपन पंडवानी कला ले सिरिफ भारत नइ, दुनिया म छत्तीसगढ़ के लोककला के धजा ल फहराइन।जभे जब महाभारत के गाथा पंडवानी के रूप म गूंजही, त मंच म तंबूरा भीम के गदा, अर्जुन के रथ अउ द्रौपदी के केस बनके इतिहास ल जगाही, तभे-तभे श्रद्धा म एकेच नाव लेहे जाही डॉ. तीजन बाई। जेन समाज हर एक बखत पंडवानी गाए बर ओमन ल समाज के बाहिर कर देहे रहीस, ओही समाज उला बाद म अपन गौरव मानिस अउ पूरा दुनिया के मनखे ओमन के कला के कायल होइन।*असाधारण सफर म नाना के संग*24 अप्रैल 1956 म दुर्ग जिला के गनियारी गांव म पारधी समाज के गरीब परिवार म ओमन के जनम होइस। ओमन के समाज के पुरखौती काम रुख के पत्ता ले बहरी बनाना अउ बेचना रहिस।पंडवानी के पहिली सीख उला अपन नाना ब्रजलाल ले मिलिस। उकर महतारी ए बात के खेलाफ रहिस, फेर नाना पूरा हिम्मत अउ पंदोला दिहिस। नानपन ले महाभारत के कथा सुनत-सुनत पंडवानी उकर जिनगी के बाहटा बनगे। उकर प्रतिभा ल पहिचान के उमेद सिंह देशमुख अनौपचारिक प्रशिक्षण दिहिस।*संघर्ष अउ समाजिक बहिष्कार*ओ बखत म माईलोगिन मन ल सिरिफ बइठ के वेदमती शैली म पंडवानी गाए के अनुमति रहिस, फेर खड़े होके अभिनय संगे म कपालिक शैली म प्रस्तुति देहे बर सिरिफ मनखे मन बर माने जावत रहिस। डॉ. तीजन बाई सिरिफ 13 बछर के उमर म ए परंपरा ल तोड़त कपालिक शैली अपनाइस ।ए हिम्मत बर ओला भारी कीमत चुकाय बर परिस।काबर के पारधी समाज ल मंजूर नइ रहिस के समाज के एक माइलोगिन मंच म खड़े होके पंडवानी गावय। सिरिफ 12 बछर के उमर उकर बिहाव होगिस, अउ घरवाला, ससुरार वाला मन घलो विरोध करिन। आखिर म घरवाला छोड़ दिस अउ समाज के पंचायत हर ओमन ल समाज ले बाहिर कर दिहिस। फेर तीजन बाई संघर्ष ले हार नइ मानिस अउ अपन साधना ल चालू रखिस।*पंडवानी ल विश्व मंच म पहुँचवइया लोकसाधिका*उकर जिनगी म सबले बड़ मोड़ आइस जब प्रसिद्ध रंगकर्मी हबीब तनवीर हर उकर प्रस्तुति देखिन। एखर बाद ओमन के कला देस-विदेस म पहुँचिस। ओ बेरा के प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी संगे दुनिया भर के प्रतिष्ठित मंच म पंडवानी के प्रस्तुति देके भारतीय लोककला ल वैश्विक पहिचान दिलाइस। उकर ए अतुलनीय योगदान बर पद्मश्री (1987), संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार (1995), पद्म भूषण (2003), फुकुओका आर्ट्स एंड कल्चर प्राइज (2018) अऊ पद्म विभूषण (2019) संग म बनेच राष्ट्रीय अउ अंतरराष्ट्रीय सम्मान मिलिस।*भिलाई इस्पात संयंत्र ले जुड़ाव*डॉ. तीजन बाई के इच्छा रहिस के मोला भिलाई इस्पात संयंत्र म नौकरी मिलय। छत्तीसगढ़ी लोककला महोत्सव मं ओमन हँसत कहत रहिन*महूं ल चपरासिन-उपरासिन के नौकरी देवा देते साहब, त बने निश्चिंत होके पंडवानी गातेंव, रोजी-रोटी के फिकर नई रहितिस।*उकर विलक्षण प्रतिभा ल पहिचान के भिलाई इस्पात संयंत्र सम्मानजनक नौकरी देहिस। सिरिफ नौकरीच नइ, देश-विदेश म अपन कला ल प्रदर्शन करे बर पूरा सहयोग अउ अजादी घलो देहिस। लगभग 30 बछर ले भिलई इस्पात संयंत्र म सेवा देहिसअउ डीजीएम के पद ले रिटायर होइन।मोरो बर गरब के बात आय के ओ भिलाई इस्पात संयंत्र परिवार के हिस्सा रहीस, जेन ए भारत के महान लोक कलाकार ल सम्मान, रोजगार अऊ दुनिया भर म अपन लोककला के पहचान बनाय बर सशक्त मंच देहिस।आज डॉ. तीजन बाई हमर बीच म नइ हेबय, फेर ओमन के संघर्ष, सरलग पंडवानी म जीयत रहिही।उकर सुरता ल सादर पायलगी जोहार,//लेखक//त्रिभुवन लाल साहू (ई.ए.)भिलाई इस्पात संयंत्रमरोदा सेक्टर ,भिलाई नगर दुर्ग, छत्तीसगढ़


