तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी
छत्तीसगढ़ के वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग में भ्रष्टाचार, वित्तीय अनियमितताओं और शासकीय कार्यों में लापरवाही को लेकर अब सख्त कार्रवाई का दौर शुरू होने की चर्चा है। विभाग के प्रधान मुख्य वन संरक्षक और वन बल प्रमुख अर (पीसीसीएफ) अरुण कुमार पाण्डेय द्वारा अपनाई जा रही “ज़ीरो टॉलरेंस” नीति के चलते विभागीय अधिकारियों एवं कर्मचारियों में जवाबदेही का माहौल बनता दिखाई दे रहा है।विभागीय सूत्रों के अनुसार प्रदेश के विभिन्न वनमंडलों से वन मंडलाधिकारियों, उप वनमंडल अधिकारियों, रेंजरों तथा अन्य वन कर्मचारियों के विरुद्ध वित्तीय अनियमितताओं, पौधारोपण कार्यों, कैम्पा योजनाओं, हरित परियोजनाओं, निर्माण कार्यों तथा विभागीय प्रशासन से संबंधित अनेक शिकायतें लगातार प्राप्त हो रही हैं। इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए पीसीसीएफ स्तर पर उनकी समीक्षा की जा रही है तथा जहां प्रथम दृष्टया तथ्य सामने आ रहे हैं, वहां नियमानुसार जांच और आवश्यक विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।जानकारों का कहना है कि लंबे समय से विभाग में शिकायतों के निराकरण की गति को लेकर प्रश्न उठते रहे हैं, लेकिन वर्तमान नेतृत्व में शिकायतों पर त्वरित संज्ञान लेने और जवाबदेही तय करने की दिशा में प्रयास तेज हुए हैं। इससे ईमानदारी से कार्य करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों का मनोबल बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है, वहीं अनियमितताओं में संलिप्त पाए जाने वाले अधिकारियों एवं कर्मचारियों में भी सतर्कता देखी जा रही है।वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग राज्य के प्राकृतिक संसाधनों, जैव विविधता, वन संरक्षण, वन्यजीव सुरक्षा तथा पर्यावरण संतुलन से जुड़ा अत्यंत महत्वपूर्ण विभाग है। ऐसे में विभाग की योजनाओं में पारदर्शिता और वित्तीय अनुशासन बनाए रखना शासन की प्राथमिकता माना जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि शिकायतों की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कठोर कार्रवाई की जाती है, तो इससे विभाग की कार्यप्रणाली और अधिक पारदर्शी एवं प्रभावी बनेगी।सूत्रों का कहना है कि पीसीसीएफ अरुण कुमार पाण्डेय का स्पष्ट संदेश है कि शासन की राशि का दुरुपयोग, भ्रष्टाचार, पद के दुरुपयोग अथवा कार्यों में गंभीर लापरवाही किसी भी स्तर पर स्वीकार नहीं की जाएगी। विभागीय नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी, जबकि ईमानदारी और उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारियों एवं कर्मचारियों को प्रोत्साहित भी किया जाएगा।वन विभाग से जुड़े जानकारों का मानना है कि यदि शिकायतों की निष्पक्ष जांच और समयबद्ध कार्रवाई की यह प्रक्रिया लगातार जारी रहती है, तो इससे विभाग में पारदर्शिता, जवाबदेही और सुशासन को नई मजबूती मिलेगी तथा शासन की जनहितकारी योजनाओं का लाभ वास्तविक हितग्राहियों तक अधिक प्रभावी ढंग से पहुंच सकेगा।


