दोनों हाथों का जादू, सपनों को मिली उड़ान: सरायपाली के होनहार वेदांत ठाकुर का अंडर-14 राष्ट्रीय क्रिकेट टीम में चयन। - Sarvavyapi दोनों हाथों का जादू, सपनों को मिली उड़ान: सरायपाली के होनहार वेदांत ठाकुर का अंडर-14 राष्ट्रीय क्रिकेट टीम में चयन। - Sarvavyapi

दोनों हाथों का जादू, सपनों को मिली उड़ान: सरायपाली के होनहार वेदांत ठाकुर का अंडर-14 राष्ट्रीय क्रिकेट टीम में चयन।

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विकास नंद/ सर्वव्यापी

प्रतिभा जब जुनून और अनुशासन से मिलती है, तो सफलता स्वयं रास्ता बना लेती है। इसका जीवंत उदाहरण बने हैं सरायपाली के होनहार क्रिकेट खिलाड़ी वेदांत ठाकुर, जिन्होंने अपनी अथक मेहनत, अद्भुत खेल कौशल और अटूट आत्मविश्वास के दम पर अंडर-14 राष्ट्रीय क्रिकेट टीम में स्थान बनाकर सरायपाली ही नहीं, बल्कि पूरे महासमुंद जिले और छत्तीसगढ़ का गौरव बढ़ाया है। उनके चयन की खबर से पूरे क्षेत्र में हर्ष और गर्व का वातावरण है।

वेदांत ने पहले रायपुर में आयोजित प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन कर चयनकर्ताओं का ध्यान आकर्षित किया। इसके बाद 23 एवं 24 जून को नई दिल्ली में आयोजित राज्य स्तरीय क्रिकेट प्रतियोगिता में देशभर से आए प्रतिभाशाली खिलाड़ियों के बीच अपने बेहतरीन प्रदर्शन से अलग पहचान बनाई। उनकी उत्कृष्ट बल्लेबाजी, प्रभावी गेंदबाजी और हरफनमौला खेल को देखते हुए उनका चयन अंडर-14 राष्ट्रीय क्रिकेट टीम के लिए किया गया।

वर्तमान में वेदांत केंद्रीय विद्यालय सरायपाली में कक्षा 8वीं के छात्र हैं। उनकी माता कुसुम ठाकुर सरायपाली विकासखंड में शिक्षिका हैं, जबकि उनके पिता धर्मेंद्र ठाकुर छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की सदस्य सरला कोसरिया के निज सहायक हैं।

वेदांत की सबसे बड़ी पहचान उनकी अनूठी प्रतिभा है। वे मूलतः बाएं हाथ के बल्लेबाज हैं, लेकिन आवश्यकता पड़ने पर दाएं हाथ से भी उतनी ही सहजता और आत्मविश्वास के साथ बल्लेबाजी करते हैं। इतना ही नहीं, वे दोनों हाथों से गेंदबाजी करने में भी समान रूप से दक्ष हैं।

क्रिकेट के हर विभाग में दोनों हाथों का समान कौशल रखने वाले ऐसे खिलाड़ी बेहद दुर्लभ होते हैं। यही विशेषता उन्हें भविष्य का एक अलग और संभावनाशील खिलाड़ी बनाती है।उनकी सफलता के पीछे वर्षों की कठिन साधना छिपी है। वे प्रतिदिन सुबह 4:30 बजे उठकर हाई स्कूल मैदान में नियमित अभ्यास करते हैं। विद्यालय की पढ़ाई पूरी करने के बाद फिर अभ्यास में जुट जाते हैं। मैदान उपलब्ध नहीं होने पर भी वे अपने कमरे में लगातार अभ्यास कर अपनी तकनीक को और बेहतर बनाते रहते हैं। खेल, पढ़ाई और अनुशासन के बीच उनका संतुलन हर युवा खिलाड़ी के लिए प्रेरणास्रोत है।

सरायपाली जैसे क्षेत्र में आधुनिक क्रिकेट सुविधाओं और उन्नत प्रशिक्षण संसाधनों के अभाव के बावजूद राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचना वेदांत की अटूट लगन, संघर्ष और आत्मविश्वास का प्रमाण है। वे खेल के साथ-साथ पढ़ाई और सामान्य ज्ञान में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हैं।वेदांत का परिवार अखिल विश्व गायत्री परिवार से जुड़ा हुआ है। परिवार का विश्वास है कि संस्कार, अनुशासन और नियमित साधना ने उनके व्यक्तित्व को मजबूत बनाया और सफलता की राह आसान की।

वेदांत ठाकुर की इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों, शिक्षकों, खेल प्रेमियों, सामाजिक संगठनों एवं नागरिकों ने उन्हें हार्दिक बधाई देते हुए उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दी हैं। सभी ने विश्वास जताया है कि यह होनहार खिलाड़ी आने वाले समय में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाकर छत्तीसगढ़ और भारत का नाम विश्व पटल पर रोशन करेगा।


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