पावन पुरी धाम के लिए पदयात्रा में निकले आचार्य पद्मलोचन महाराज…

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विकास नंद/ सर्वव्यापी/

सरायपाली के आचार्य पदमलोचन महाराज पुरी धाम के लिए 3 जून को पदयात्रा करते हुए निकले हैं पैदल चलते हुए आचार्य लगभग 15 दिनों में पुरी धाम पहुंचेंगे अभी लगभग 250 किलोमीटर की यात्रा करते हुए अंगुल पहुंच चुके है “जब संत धरती पर चलते हैं, तब प्रभु की कृपा स्वयं साथ चलती है।”ऐसी ही एक अनुपम यात्रा इन दिनों प्रारंभ हुई है — आचार्य पद्मलोचन महाराज की श्री जगन्नाथ पुरी की ओर पदयात्रा।यह केवल एक बाह्य यात्रा नहीं, बल्कि एक अंतर्यात्रा है — आत्मा से प्रभु तक, व्यक्ति से विराट तक, संकल्प से समर्पण तक।🛤️ अब तक की यात्रा का संक्षिप्त विवरण इस प्रकार है:🔸 प्रथम रात्रि प्रवास – घाटकछारहरियाली से आच्छादित शांत घाटकछार की भूमि ने सबसे पहले महाराज का स्वागत किया। वहाँ का वातावरण जैसे प्रतीक्षा कर रहा हो एक दिव्य उपस्थिति की। रात्रि में संतों के मधुर भजन और प्रभु स्मरण की ध्वनि ने पूरा वातावरण भक्तिमय कर दिया।🔸 दूसरा पड़ाव – बरगढ़ (Bargarh) बरगढ़ में प्रवेश करते ही भक्ति का ज्वार उमड़ पड़ा। नगरवासियों ने भव्य पुष्पवर्षा और संकीर्तन के साथ महाराज का स्वागत किया।महाराज ने कहा💬 “भक्ति कोई एक दिन की भावना नहीं है। यह जीवन की शैली है, जिसमें हर सांस भगवान को समर्पित हो।”🔸 तीसरा पड़ाव – संबलपुर (Sambalpur)संबलपुर की भूमि पर जैसे ही चरण पड़े, वहाँ की वायु भी आनंदित हो उठी। नगर के प्रमुख संतजन, विद्वान और सैकड़ों श्रद्धालु बड़ी श्रद्धा से दर्शन करने पहुँचे।यहाँ महाराज जी माँ समलाई के भी दर्शन आरती किए 💬 महाराज ने संबलपुर में भक्तों को यह संदेश दिया:“पदयात्रा केवल चलना नहीं, यह अंतर्यात्रा है — जहाँ हर कदम पर प्रभु का स्मरण हो और हृदय में प्रेम का विस्तार हो।”आगामी पड़ाव4रेडख़ोल 5 बोएंडा 6 अंगुल इस प्रकार की आगे पड़ाव के साथ। पूरी की यात्रा संपन्न करेंगे 🙏 वहाँ उपस्थित हजारों भक्तों ने हाथ जोड़कर प्रार्थना की:👉 “हे प्रभु, हमारे संत की यात्रा को सफल, रोगविनाशक, और कल्याणकारी बनाओ। उनकी कृपा से ही हमारा जीवन दिशा पाता है।”✨ यात्रा के दौरान हर दिन प्रभातकालीन हरिनाम संकीर्तन,और सायंकालीन भजन-संध्या का आयोजन हो रहा है, जिससे हर स्थल एक चलती-फिरती तीर्थभूमि बन गया है।🌼 अब महाराज अगली दिशा में प्रस्थान कर रहे हैं। यह यात्रा न केवल पुरी की ओर जा रही है, बल्कि लाखों हृदयों को प्रभु-भावना से भरती हुई आगे बढ़ रही है।📣 हम सभी उनके श्रीचरणों में कृतज्ञता व्यक्त करते हैं और प्रार्थना करते हैं:“हे प्रभु! हमारे पूज्य संत की यह यात्रा संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए मंगलकारी हो। उनके पवित्र चरण जहाँ-जहाँ पड़ें, वहाँ धर्म, भक्ति और प्रेम की वर्षा हो।” आज के आधुनिक समय में समाज कल्याण की मंशा तो बहुत लोग करते हैं परंतु ऐसे कठिन रास्ते अपनाकर स्वयं को तकलीफ देकर समाज कल्याण के उद्देश्य से खुद को समाज के लिए समर्पित करने की भावना रखने वाले साधु संत बहुत विरले नज़र आते हैं सर्वव्यापी परिवार की ओर से हम आचार्य पद्ममलोचन महाराज की यात्रा की सफलता के लिए मंगल कामना करते हैं।


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