बिलासपुर/ तरुण कौशिक/ संपादक सर्वव्यापी/
छत्तीसगढ़ की न्यायधानी में नगरीय निकाय चुनाव को लेकर प्रशासन गंभीर दिखाई दे रही है तो वहीं महापौर प्रत्याशियों के बीच आरोप -प्रत्यारोप का दौड़ भी शुरू हो चुका है। जिसमें कांग्रेस के महापौर प्रत्याशी प्रमोद नायक ने भाजपा के महापौर प्रत्याशी पूजा विधानी की सच्चाई जनता के बीच ला दिया है और पूजा का मूल नाम के साथ उसे गैर छत्तीसगढ़िया होने का प्रमाण भी जिला निर्वाचन अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत किया था और इनका नामांकन निरस्त करने की मांग भी की गई थी परन्तु जिला निर्वाचन विभाग ने पूजा को पिछड़ा वर्ग का होने का प्रमाण पाते ही आरोप को निराधार पाते हुए प्रमोद की शिकायत को नस्तीबद्ध कर किया है। वहीं इस मामले को लेकर कांग्रेस हाईकोर्ट की शरण में जाने की बात कह रहे हैं लेकिन 10 दिन के बाद महापौर और पार्षद पदों पर मतदान हो जाएगा लेकिन इस बीच कांग्रेस के छत्तीसगढ़िया महापौर प्रत्याशी प्रमोद नायक ने भाजपा के प्रत्याशी पूजा विधानी की गैर छत्तीसगढ़िया होने का खुलासा करके बिलासपुर की छत्तीसगढ़िया लोगों को सोचने को मजबूर कर किया है कि इस बार के महापौर पद पर राजनीति दल दल से ऊपर उठकर छत्तीसगढ़िया महापौर बनाए जाए या फिर गैर छत्तीसगढ़िया की जीत कराकर छत्तीसगढ़ियों को एक बार फिर गैर छत्तीसगढ़ियों के सामने कठपुतली बनकर रहना पड़ेगा। निश्चित रुप से छत्तीसगढ़ राज्य ऐसा पहला राज्य है, जहां पर मूल छत्तीसगढ़ियों का नहीं बल्कि गैर छत्तीसगढ़ियों का राज चल रहा है और इसका मुख्य कारण छत्तीसगढ़ की राजनीतिक से जुड़े वरिष्ठ नेता हैं जो चंद रुपये के कारण गैर छत्तीसगढ़ियों को आगे बढ़ाकर अपने आने वाले पीढ़ियों के लिए बड़ी मुसीबत खड़ी करने में लगे हुए हैं। इस पूरे मामले ने अब छत्तीसगढ़ियों को जगाने का काम किया है और अब देखना यह है कि बिलासपुर शहर की जनता छत्तीसगढ़ के माटी पुत्र प्रमोद नायक को महापौर की कुर्सी पर बिठाते हैं या फिर खुद को उड़िया, तेलुगू साबित कर चुकी पूजा विधानी को जनता महापौर चुनती है। वहीं इस पूरे मामले की विस्तृत खबर अगले अंक में पढ़िए…