अमन कुटीर में हुआ शाम-ए-ग़ज़ल महफ़िल का आयोजन…रात दिन जो हाँकते हैं, उनमें हम शामिल नहीं।

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वर्धा/बिलासपुर/ तरुण कौशिक/ संपादक सर्वव्यापी /अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की पूर्व संध्या पर स्थानीय अमन कुटीर में शाम-ए-ग़ज़ल महफ़िल का आयोजन किया गया। आयोजक डॉ.अनवर अहमद सिद्दीक़ी ने आमंत्रित कवियों का स्वागत एवं संचालन किया। इस आयोजन में मुख्य अतिथि के रूप में चेन्नई से पधारे पूर्व राजभाषा अधिकारी व प्रसिद्ध कवि ईश्वर करुण, समस्तीपुर बिहार से सीमा, जयपुर की कथाकार कविता मुखर, जयपुर की कवयित्री निरुपमा चतुर्वेदी, सेवाग्राम से डॉ. शहनाज़ शेख़, वर्धा से डॉ. अफ़साना मंसूरी, डॉ. अब्दुल कादर मंसूरी, सृजन समय के संपादक डॉ. आशीष कुमार, बुंदेलखंड से डॉ. नित प्रिया प्रलय आदि उपस्थित रहे। चेन्नई के कवि ईश्वर करुण ने रात दिन जो हाँकते हैं, उनमें हम शामिल नहीं। और… समंदर से रिश्ता पुराना बहुत है। मेरे दर्द का वह दीवाना बहुत है। रचना सुनाकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कवयित्री सुश्री सीमा ने बज्जिका गीत मनवाँ रहेला चिंतित हो, अब मैं दुनिया में तनहा अकेली, मेरे साथ मैं और मेरा मन सहेली… रचना प्रस्तुत की। जयपुर की कवयित्री सुश्री निरुपमा चतुर्वेदी ‘रूपम’ ने हादिसे यूँ तो अज़ाबों में सफ़र करते हैं। तज्रिबा बन के मिसालों में सफ़र करते हैं। जयपुर की कथाकार सुश्री मुखर कविता ने लहू के दाग लहू से धो रहे हो, ये क्या कर रहे हो? रचना पेश की। आयोजक डॉ. अनवर अहमद सिद्दीक़ी ने जाने वो किस बात की आज़माईश रखता है, रूठा है हमसे, मिलने की गुंज़ाइश रखता है। और… रौशनी को वो स्याह अंधेरों में तलाश करता है। कारीगर वो मूरत को पत्थरों में तलाश करता है।

रचना पेशकर श्रोताओं की वाहवाही लूटी। उसी तरह डॉ. शहनाज़ शेख़ ने खामोशी रचना सुनाई तो डॉ. अफ़साना मंसूरी ने शोला शबनम रचना पेश की। इस अवसर पर नित प्रिया प्रलय, डॉ. आशीष कुमार और डॉ. अब्दुल कादर मंसूरी ने भी अपनी अपनी रचनाएं सुनाई। महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के जनसंपर्क अधिकारी बी. एस. मिरगे ने आभार ज्ञापित किया। सानिया अनवर ने फोटोग्राफी व अनमोल रत्न ने वीडियोग्राफी में तथा आयोजन की सफलतार्थ शहनाज़ सिद्दीक़ी, आशना और अमन अनवर सहयोग किया।


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