कवर्धा/चेतन साहू / ब्यूरो चीफ सर्वव्यापी/
छत्तीसगढ़ की राजनीति में मंत्री मंडल विस्तार को लेकर सस्पेंस गहराता जा रहा है। कभी तारीख तय होने की चर्चा, तो कभी अंतिम क्षण में कार्यक्रम टल जाना। इन उतार-चढ़ावों ने भाजपा सरकार और संगठन दोनों को असमंजस की स्थिति में डाल दिया है। अब स्थिति यह हो गई है कि कब क्या हो जाए, किसी को स्पष्ट रूप से अंदाजा नहीं है।विश्वस्त सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय नेतृत्व की ओर से मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को यह संकेत दिया गया है कि बिलासपुर से चार बार विधायक रह चुके पूर्व मंत्री अमर अग्रवाल और दुर्ग से पहली बार विधायक बने गजेन्द्र यादव को मंत्री बनाए जाने का निर्णय लगभग तय है। हालांकि, अंतिम मुहर मुख्यमंत्री और संगठन की सहमति पर ही लगेगी।अमर अग्रवाल लंबे राजनीतिक अनुभव और शहरी क्षेत्र में संगठनात्मक पकड़ के लिए जाने जाते हैं। वे रमन सरकार में वित्त, नगरीय प्रशासन, वाणिज्यिक कर जैसे अहम विभाग संभाल चुके हैं। वहीं, गजेन्द्र यादव पार्टी के युवा चेहरे हैं, जिनका संगठन से गहरा जुड़ाव माना जाता है। एक वरिष्ठ और एक नये चेहरे को साथ लेकर चलने की यह कवायद भाजपा के सामाजिक और राजनीतिक समीकरण को साधने की रणनीति के तौर पर देखी जा रही है।फिर भी सवाल यही है कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय किस तरह इस चुनौतीपूर्ण संतुलन को साधते हुए वरिष्ठ विधायकों की नाराज़गी, संगठन का दबाव और क्षेत्रीय समीकरण मिलकर यह तय करेंगे कि विस्तार का चेहरा क्या होगा।राजनीतिक जानकारों का कहना है कि मंत्रिमंडल विस्तार में हो रही लगातार देरी भाजपा की छवि को प्रभावित कर रही है। जनता और कार्यकर्ताओं में बेचैनी बढ़ रही है, वहीं विपक्ष भी इसे सरकार की अस्थिरता और आंतरिक खींचतान का प्रतीक बताने से नहीं चूक रहा।अब निगाहें मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के अगले कदम पर टिकी हैं। क्या वे अमर अग्रवाल और गजेन्द्र यादव के नामों को सहमति देंगे? क्या अन्य वरिष्ठ नेताओं को भी संतुष्ट करने का रास्ता निकालेंगे? या फिर मंत्रिमंडल विस्तार की घड़ी एक बार फिर टल जाएगी? इन सवालों का जवाब आने वाले दिनों में छत्तीसगढ़ की राजनीति की दिशा तय करेगा।