विकास नंद/ सर्वव्यापी/
माननीय उच्च न्यायालय की फटकार और कलेक्टर के सख्त आदेशों के बावजूद सड़कों पर आवारा पशुओं का डेरा जस का तस बना हुआ है। स्थिति यह है कि नगर के प्रमुख मार्गों पर मवेशियों का जमघट आम बात हो गई है। इससे जहां आए दिन सड़क दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ रहा है, वहीं गौवंश की मौत और लोगों के जान-माल का नुकसान भी लगातार सामने आ रहा है।
जिला कलेक्टर विनय कुमार लंगेह ने कुछ दिनों पूर्व सभी नगरीय निकायों के सीएमओ की बैठक लेकर साफ कहा था कि आवारा पशुओं को सड़क से हटाने में लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी। टास्क फोर्स गठित कर नियमित कार्रवाई और जुर्माना लगाने के भी निर्देश जारी किए गए थे। शुरुआती कुछ दिनों तक असर जरूर दिखा, लेकिन उसके बाद फिर अधिकारी-कर्मचारी ढर्रे पर लौट आए और हालत पहले जैसे हो गए कलेक्टर लगेंह द्वारा प्रत्येक साप्ताहिक बैठकों में बार निर्देश दिए जाने पर भी स्थानीय प्रशासन द्वारा लगातार लापरवाही बरती जा रही है जो कि एक चिंतनीय समस्या बन गई है।
स्थानीय नागरिकों और व्यापारियों का कहना है कि शासन-प्रशासन केवल बैठकों और आदेशों तक सीमित है। जमीन पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं दिख रही। आए दिन लोग सड़क पर दुर्घटना का शिकार हो रहे हैं और मवेशियों की मौत भी हो रही है। सामाजिक संगठनों का कहना है कि यह केवल लापरवाही नहीं, बल्कि जनता और न्यायालय दोनों के आदेशों की अवहेलना है।
नागरिकों का आरोप है कि अधिकारी कर्मचारियों की उदासीनता से सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं और छवि भी धूमिल हो रही है। लोग अब सीधे-सीधे जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करने लगे हैं।