तिफरा का गोकने नाला , करोड़ों की स्वीकृति के बाद भी अधूरी विकास गाथा।

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बिलासपुर/ भागवत प्रसाद/ ब्यूरो चीफ सर्वव्यापी

बिलासपुर नगर निगम के अंतर्गत बिल्हा विधानसभा के तिफरा नगर पालिका को बिलासपुर नगर निगम में शामिल किया गया है ,जो अब वार्ड क्रमांक 5 के नाम से जाना जाता है। यहां के गोकने नाला को बाढ़ से बचाने के लिए पूर्व विधानसभा अध्यक्ष एवं वर्तमान विधायक धरम लाल कौशिक ने करोड़ों रुपए स्वीकृत कराकर नवनिर्माण कराया। इसके साथ ही तिफरा फ्लाईओवर ब्रिज के पास नाला के दोनों ओर से यदुनंदन नगर जाने के लिए कच्ची सड़क भी बनाई गई।इस दौरान कांग्रेस सरकार में एक वरिष्ठ पत्रकार ने भी आवाज उठाई थी कि गोकने नाला के दोनों ओर बनी कच्ची सड़क को सीसी रोड बनाया जाए और आर्या कालोनी रोड़ तिफरा,जिसे सरल भाषा में कुंदरापारा के नाम से जाना जाता है,संजय जायसवाल के घर के पास स्थित ट्रांसफार्मर से जुड़ते पुराने रास्ते (जो हाईस्कूल तक पहुंचाता है) पर पुल का निर्माण किया जाए। किए जाने की मांग रखी थी और इसे भूपेश बघेल सरकार ने स्वीकृत भी किया।इस पूरी लड़ाई में वार्ड पार्षद गायत्री लक्ष्मी नाथ साहू की भूमिका को भी अहम माना जाता है। उनकी सक्रियता के चलते ही मांग को स्वीकृति मिली।लेकिन अब, स्वीकृति के बाद भी नाले के एक ओर सीसी रोड निर्माण और स्ट्रीट लाइट लगाने को लेकर भेदभाव किया जा रहा है। इस पर कुंदरापारा के रहवासियों का आरोप है कि सुविधाएं बराबरी से नहीं दी जा रहीं, जबकि काम पूरे वार्ड के लिए स्वीकृत हुए थे।कुंदरापारा के लोगों का कहना है कि नाले के एक तरफ सीसी रोड की सुविधा मिल रही है।दूसरी ओर के रहवासी कीचड़ भरे रास्तों से जूझ रहे हैं। वहीं पुल निर्माण और हाईस्कूल तक पहुंच का मामला भी अधर में लटका है। स्थानीय लोग अब सवाल उठा रहे हैं कि जब करोड़ों रुपए की स्वीकृति पहले ही हो चुकी है तो फिर विकास कार्य में भेदभाव क्यों? क्या यह राजनीति का दबाव है या प्रशासन की लापरवाही?


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