तरुण कौशिक/संपादक सर्वव्यापी/
छत्तीसगढ़ मं तीजा के पर्व मया, ममता, आस्था अउ अपन सांस्कृतिक पहचान ला संजोए रखे हवय। तीजा खास करके हरियाली तीज, कजरी तीज अउ हरतालिका तीज के रूप मं मनाय जाथे। इही तीजा परब मं छत्तीसगढ़ के घर-घर मं नवा उमंग देखे ला मिलथे।तीजा दिन ला मया ममता के परब कहे जाथे, काबरकि ये दिन हर घर के बेटी-बहिनी अपन माई-दा, भाई-भतीजा, ससुराल-मैके के संगी-साथी संग मिलके गा-नाच करथे, अपन दुख-दर्द बांटे के संग मया के बंधन ला अउ गाढ़ा करथे।तीजा के दिन बहिनी मन उपवास रखथे, शिव-गौरी के पूजा-अर्चना करथे। भगवान शिव-गौरी संग नारी शक्ति के दृढ़ता अउ पवित्रता के प्रतीक रूप मं मानाय जाथे। विश्वास हावय कि उपवास, प्रार्थना अउ भक्ति संग जीवन के संकट दूर होथे अउ घर-परिवार मं सुख-शांति बने रहिथे।छत्तीसगढ़ी तीजा केवल उपवास भक्ति तक सीमित नई ये। ये दिन बहिनी मन अपन माई-दा घर जाथे। भाई-भतीजा मन अपन बहिनी ला मान-सम्मान संग ले जाथे। बहिनी मन माई-दा घर मं रहिके गीत-नाचा करथे, संगी-साथी संग गोठ-बात करथे। येही एक अवसर होथे जिहां नारी मन अपन मैका के मया ला जी भर भोगथे।तीजा गीत मन छत्तीसगढ़ी संस्कृति के गहिर निचोड़ हवंय। “तीजा तिहार मया मया के तिहार” जइसने गीत मन बहिनी मन के मया-ममता अउ मिलन के भाव ला गाढ़ करथे। लोकगायन, देवारी-देवारी, झूमर अउ करमा नाचा जइसने रंगारंग कार्यक्रम मन ये तिहार के रंग ला अउ गाढ़ा करथे।आज जब समाज मं आधुनिकीकरण के दौड़ चलत हावय, तीजा जइसने तिहार मन हमन ला अपन जड़, अपन पहचान अउ अपन संस्कृति संग जोड़े के काम करथें। ये पर्व नारी शक्ति के सम्मान, परिवार के मया अउ भाई-बहिनी के अनमोल रिश्ते के प्रतीक हावय।तीजा पर्व केवल उपवास अउ पूजा नई, ये तो छत्तीसगढ़िया अस्मिता, अपनापन अउ ममता के परब हावय। हम सब ला चाही कि तीजा जइसने तिहार मनाय के संग-संग अपन नवा पीढ़ी ला ये संस्कृति अउ मूल्य के शिक्षा देवत रहन। काबरकि तीजा तो हमर “छत्तीसगढ़ी गोंठ-गंवई के आत्मा” हावय।